अभिभावकों को जलील और बदनाम करने वाले, निजी स्कूल के लोगों के पास कार ,फ्लैट ,आलीशान स्कूल भवन, कोट ,टाई ,घङी कहां से आया?

अभिभावकों को जलील और बदनाम करने वाले, निजी स्कूल  के लोगों के पास कार ,फ्लैट ,आलीशान स्कूल भवन, कोट ,टाई ,घङी कहां से आया? 
     
Awadhesh Kumar Singh

   शोसल मीडिया पर अभिभावकों को शुनियोजित ढंग से बदनाम कर रहे हैं निजी स्कूल के कुछ लोग!अभिभावकों को उनकी हैसियत की चुनौती दी जा रही है !जबकि इसी अभिभावक के तीन माह के फीस पर माफी को ले कर स्कूल वाले हाय -तौबा मचाए हुए हैं। निजी स्कूल चलता है अभिभावकों के बच्चों के फीस से! स्कूल प्रबंधन का घर चलता है बच्चों के फीस से! स्कूल प्रबंधन कर्मचारियों शिक्षकों को वेतन देते हैं बच्चों के फीस से! स्कूल प्रबंधन के परिवार के सदस्य स्कूल के डायरेक्टर, मैनेजर और प्राचार्य बनते हैं बच्चों के फीस के बदौलत ! स्कूल प्रबंधन के बेटे -बेटियां ऊंची 
शिक्षा ऊंची ओहदा पर पहुंचते हैं स्कूल में जमा किए गए फीस के लाभ से! स्कूल प्रबंधन के डायरेक्टर, प्राचार्य बङी एसी गाङियां खरीदते है बच्चों के फीस से! स्कूल प्रबंधन के परिवार के सदस्य महंगी कार स्कूटी खरीदते हैं बच्चों द्वारा स्कूल मे जमा किए गए लाभ से! स्कूल के डायरेक्टर के कोट, टाई, घङी जूता उनके बदन पर शुशोभित होती है बच्चों की फीस से! सालों तक बच्चे और अभिभावक स्कूल के नियमावली के अनुसार स्कूल में फीस जमा करते आ रहे हैं, परंतु आज जब कोरोना लाॅक डाउन में 60-70 दिन से 80%प्रतिशत अभिभावक परेशान है और वह सरकार से मांग कर रहे है निजी स्कूलों द्वारा
तीन माह की फीस और ऐनुअल चार्ज की मोटी रकम वसूली में रियायत की तो स्कूलों के नौकरशाह को बूरा लग रहा है! इतना हीं नहीं कुछ स्कूल के डायरेक्टर दर्जे के लोग शोसल मीडिया पर अभिभावकों का मजाक उङा रहे हैं वह भी घटिया स्तर से! इनका कहना है कि अभिभावक 599 का रिचार्ज करा सकते हैं फीस नहीं दे सकते (?) अभिभावक कार और मोटर साईकिल खरीद सकते हैं स्कूल को फीस नहीं दे सकते (?) अभिभावक बेटी की शादी कर सकते हैं स्कूल की फीस नही दे सकते (?) अभिभावक घर बना सकते हैं स्कूल की फीस नहीं दे सकते (?) अभिभावक होटल में खाना खा सकते हैं फीस नहीं दे सकते (?)अब आप हीं सोचिए कि संकीर्ण सोच के वो डायरेक्टर दर्जे के लोग कैसे होंगे जो शिक्षा के मंदिर में रहकर बच्चों और उसके अभिभावकों के प्रति कितना निम्न सोच रखते हों ,यह भी ज्ञात हो की दो कमरे में शुरु होने वाला स्कूल की बिल्डिंग आज 4-5-6एकङ में है यह सब कहां से आया? स्कूल प्रबंधन के लोगों का आलीशान घर मकान जमीन फ्लैट कहां से आया? यह सब बच्चों के फीस से हीं आया! परंतु आज कोरोना त्रासदी में थोङी सी दिक्कत क्या आई अभिभवकों ने तीन महीने की फीस और ऐनुअल चार्ज में राहत /रियात क्या मांगी आभिभिवकों को निजी स्कूल वाले अपना दुश्मन समझ बैठे और लगे अभिभावकों पर कीचङ उच्छल कर बदनाम करने! जबकि वो भले हीं शिक्षादाता हों परंतु अभिभावक और बच्चे उनके अन्न दाता हैं उन्हीं के फीस से चलती है स्कूल प्रबंधन की शान और शौकत! स्मरण कर लें तीन महीने के फीस बिलंब में ही निजी स्कूल वालों आपकी स्थिति प्रवासी देहाङी मजदूर से भी बदतर हो गई !थोडा अपने लक्ष्मी का आदर करना सीखिए निजी स्कूल के डायरेक्ट साहब! ईगो छोङए जरा संस्कारी बनिए! चर्चा है स्कूल जो बच्चों के फीस मद में लेता है उसका 30% हीं शिक्षक और कर्मचारी पर खर्च करते हैं बाकी 70% स्कूल प्रबंधन का लाभ होता है तो क्या विपदा की घङी में तीन महीने का वेतन शिक्षक और कर्मचारियों नहीं दे सकता है निजी स्कूल? सभी जानते है नामी निजी स्कूल शिक्षकों को मानकों के अनुसार वेतन नहीं देते यहां भी शोषण किया जाता है वेतन के मामले में शिक्षकों का!!!

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