झारखंड की राजधानी रांची में युवा दस्ता का गठन और
उसका इतिहास बतलाया डाॅ0 प्रणव कुमार बब्बू ने
1992 वर्ष में युवा दस्ता का स्थापना उस वर्ष के रांची महानगर दुर्गा पूजा समिति के केंद्रीय अध्यक्ष डॉ प्रणव कुमार बब्बू ने की थी जिसमें मौले सिंह को अध्यक्ष बनाया गया था. प्रथम वर्ष ही 1000 से भी ज्यादा सदस्यों को जोड़ा गया था इसके पीछे यह सोच थी की पूजा पंडाल में शहरी ग्रामीण महिला बूढ़े बुजुर्ग दर्शन को रांची में आते हैं और रांची ही नहीं उस समय कई जिलों से लोग रांची के आकर्षण को देख करके आते थे ऐसे में असामाजिक तत्वों का बोलबाला महिलाओं के साथ छेड़खानी बच्चे का गुमशुदा किसी की तबीयत खराब होना अस्पताल पहुंचाना बहुत सारी समस्याएं साथ में निकटवर्ती रोड का नहीं होना इन सब विषयों पर बहुत बड़ा एक बैठक करके वैसे युवाओं को वैसे छात्रों को इस में जोड़ा गया था जिनका सोच बहुत ही सकारात्मक था .इस युवा दस्ता को बनाने के पीछे उस समय मुख्य सलाहकार सदस्यों में रांची के तत्कालीन उपायुक्त सुधीर प्रसाद सीनियर एसपी सीएसजेएम एडिशनल एसपी अरविंद पांडे एसडीओ राणा अवधेश सहित पत्रकार हरि नारायण सिंह रजत गुप्ता प्रकाश सहाय प्रोफेसर अजीत सहाय रंजन सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका थी प्रणव कुमार बाबू के ही प्रयास से उस समय एकीकृत बिहार अब झारखंड में एक ऐसा सामाजिक ग्रुप बना जो शहर में किसी भी तरह के व्यवधान उत्पन्न होने पर 100 लोग तुरंत पहुंच जाते थे और समझा-बुझाकर के स्थिति को नियंत्रण में करते थे इसमें डोरंडा कांड कांटा टोली कांड कई जगहों पर लगातार ऐसा काम होता था और युवा दस्ता बहुत अल्प समय में बब्बू जी के नेतृत्व में बहुत आगे बढ़ा उस समय प्रथम बार ऐसा कुछ हुआ जिससे रांची के उपायुक्त अपने सिग्नेचर और मोहर करके युवा दस्ता के सदस्यों को पहचान पत्र निर्गत करना शुरू किया जिसमें उस समय के एडीएम एके राय अब स्वर्गीय का बहुत महत्वपूर्ण योगदान था उपायुक्त के निर्देश पर यह कार्य हुआ जो ऐतिहासिक रहा इसके पहले किसी भी धार्मिक संगठन के लोगों को सदस्यों को प्रशासन कभी परिचय पत्र नहीं दी थी और वह सिलसिला आज तक चलता रहा.
पहले कमेटी में मुख्य संयोजक डॉ प्रणव कुमार बब्बू
अध्यक्ष मौले सिंह सचिव राजेश गुप्ता छोटू थे
प्रथम बार ही युवा दस्ता का शिविर रांची शहर के प्रमुख स्थलों पर दर्शनार्थियों के सहायता के लिए लगना शुरू हुआ कई विषम परिस्थितियों में युवा दस्ता का अभूतपूर्व योगदान रहा अलग-अलग समय बनाकर के 24:00 100 घंटे युवा दस्ता के 1000 से ज्यादा सदस्य बैच लगाकर के प्रत्येक जगह दिखते थे जिस तरह से आज पुलिस दिखती हैं

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