प्राथमिक शिक्षक संघ संगठन युपीपीएसएस-1160
का पूर्व में स्थगित 55वां प्रान्तीय अधिवेशन
चारबाग लखनऊ में सम्पन्न
हुबहू प्रकाशित : सम्मानित शिक्षक बंधुओ/बहनों जैसा कि आप सभी अवगत हैं कि प्राथमिक शिक्षक संघ जौनपुर/ लखनऊ-1160 एकमात्र मान्यता प्राप्त संगठन है जो सन 1921 से शिक्षकों को सुरक्षा प्रदान करते हुए उनकी मांगो को पूर्ण कराने और उन्हें शोषण व उत्पीड़न से बचाने हेतु संघर्षरत है, लेकिन पिछले 10-12 वर्ष पहले से अबतक के इसके इतिहास को देखा जाय तो स्पष्ट हो जाता है कि शासन-प्रशासन और सरकार द्वारा लगातार शिक्षको की मांगों को दरकिनार करते हुए अध्यापक विरोधी निर्णय लिये जा रहे है। कारण आप सभी जानते हैं- प्राथमिक संघ में फूट पड़ना, स्वार्थ के वशीभूत कतिपय शिक्षको द्वारा कूटनीति और साजिशो के माध्यम से हमारे अध्यापक भाईयो को गुमराह करके स्वयंभू को अध्यक्ष के रूप में प्रदर्शित करते हुए तमाम संगठनों का प्रकट होना। इन संगठनों ने अपने स्वार्थहित मे अध्यापको के हितों को अनदेखा करते हुए उच्च अधिकारियों तक को गुमराह करने का कार्य किया है ,,,आज पूरे प्रदेश का आलम ये है कि पूरा शिक्षक समुदाय त्राहि-त्राहि कर रहा है,,विभागीय अधिकारी मनमानी तरीके से भयमुक्त होकर शिक्षको पर अत्याचार कर रहे है , कहीं भी शिक्षकों की सुनवाई नही है,,,उच्चाधिकारी अधिकारियों के पक्ष में निर्णय ले रहे है, जिसके कारण अध्यापक बाध्य होकर कोर्ट कचहरी का चक्कर लगा रहा है, अधिकारी इतने बेलगाम हो चुके है कि वह कोर्ट के आदेशों को भी पैरों तले रौंद रहे है,शासनादेशों की धज्जियां उड़ा रहे है। इनपर किसी का अंकुश नही रह गया है। कारण साफ है कि शिक्षक नेता अपने पद की गरिमा को भूल कर स्वयं भ्रष्ट हो चुके हैं, यह लोग अपने फर्ज से विमुख होकर शिक्षक वर्ग के शोषण और उत्पीड़न में सहयोगी की भूमिका में काम कर रहे है।आज संगठन के संविधान के तहत जो सदस्यता शुल्क 25 रु0 वार्षिक है उसे विभिन्न संघ उ0प्र0 के हर ज़िलें में 100 रु0 से लेकर 200 रु0 तक वसूल रहे हैं , जबकि सदस्यता शुल्क बढ़ाने संबंधी कोई भी निर्णय प्रदेशीय संगठन द्वारा पारित नही हुआ है ,फिर ये शिक्षक नेता गण इस तरह की लूट-खसोट क्यो और किस प्रकार कर रहे हैं ?अब तक हुए करोड़ों रुपयों के चंदे घोटाले का जिम्मेदार और जवाबदेह कौन है? शिक्षकों के साथ हो रहे अन्याय , शोषण और उत्पीड़न का ज़िम्मेदार व जवाबदेह कौन है? शिक्षको को अबतक 17140 /- का लाभ क्यो नही मिल पा रहा है ?
शिक्षकों की जो पुरानी पेंशन छीन ली उसका ज़िम्मेदार कौन है ?जिस वक्त पेंशन खत्म की गई थी उसी वक्त शिक्षक नेताओ ने इसका पुरजोर विरोध क्यो नही किया? पिछले 10-12 वर्षों से बेसिक शिक्षकों के बाल्य देखभाल अवकाश ,मातृत्व अवकाश, बकाया वेतन आदि लीगल कार्यो के जरिये खुल्लमखुल्ला रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है और उनका लगातार आर्थिक उत्पीड़न किया जा रहा है, इस टॉपिक पर शिक्षक नेता चुप्पी क्यो साधे हुए है। नियमो को दरकिनार करते हुए किये जा रहे अनीतिपूर्णकार्यो यथा-निलम्बन, सेवासमाप्ति,स्थानांतरण, लोन , समायोजन ,के माध्यम से हमारे शिक्षक भाई-बहनों का आर्थिक और मानसिक रूप से शोषण किया जा रहा है इसका ज़िम्मेदार और जवाबदेह कौन है ? आज परिषदीय शिक्षको को हर ब्यक्ति हेय की दृष्टि से देख रहा है अध्यापक के इस मान - मर्दन का असली कारण क्या है? अध्यापक वर्ग संगठन पर भरोसा क्यो नही कर पा रहा है? आज यह सब आत्ममंथन का विषय है, इन परिस्थितियों पर चिंतन और मंथन करके इससे निजात पाने हेतु सकारात्मक और ठोस कदम उठाने की जरूरत है, इसी विषयान्तर्गत उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ जौनपुर/उत्तर प्रदेश-1160 द्वारा स्थगित 55वें प्रान्तीय अधिवेशन का आयोजन दिनांक 29-09-2020 को कान्यकुंज कालोनी चारबाग में किया गया जिसे कोरोना महामारी के कारण ऑन लाइन और ऑफ लाइन रूप से पूर्ण किया गया। प्रान्तीय अधिवेशन के पहले चरण में प्रातः 9 से 12 बजे तक अध्यापकों की समस्याओं और उनकी संगठन से क्या-क्या अपेक्षाऐ है इस विषयान्तर्गत ऑन लाइन वार्ता की गई जिसमें उपस्थित शिक्षक समुदाय का उत्साह और सहभागिता सराहनीय रही। शिक्षक बंधुओ द्वारा हमारे समक्ष रखे गए सुझावो व समस्याओ को प्रदेशीय कार्यकारिणी ने अपने प्रस्ताव में वरीयता देते हुए इस प्रकार रखा---
1-पुरानी पेंशन बहाल कराई जाए।
2-अध्यापको को 17140 का लाभ दिलवाया जाय।
3-किसी भी रूप में हो रहे शिक्षक उत्पीड़न और शोषण को रोकते हुए रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार पर पूर्ण रूप से अंकुश लगवाया जाए।
3- विभाग द्वारा पारित नित नये नियमो का सही ढंग से अनुपालन कराने और अध्यापको को ऑन- लाइन सूचनाओं का आदान प्रदान करने हेतु पहले प्रशिक्षित किया जाय फिर टैबलेट और नेट उपलब्ध कराया जाय,तत्पचात ही उनसे सूचनाओ की अपेक्षा की जाय । ऐसा न होने तक अधिकारियों द्वारा शिक्षको को ब्यक्तिगत संसाधन से सूचनाये मुहैया कराने हेतु बाध्य न किया जाय।
4-विभाग और अधिकारियों की फूट डालो और राज करो कि मंशा पर अंकुश लगाते हुए जाति-धर्म और संवर्ग से ऊपर उठकर शिक्षक हित मे एकजुट होकर कार्य करने की रणनीति पर बल दिया गया ।
5-वर्षो से बाधित प्रमोशन प्रक्रिया को शुरू कराते हुए प्रत्येक शिक्षक को अपने सेवाकाल में कम से कम तीन प्रमोशन के लाभ दिलाने हेतु कारगर प्रयास किया जाय।
6-बढ़ती मंहगाई को देखते हुए अध्यापको को कम से कम 5 लाख का बीमा कराते हुए उन्हें अन्य कर्मचारियों की भाँति मेडिकल सुविधा मुहैया कराई जाए।
7-शिक्षको का हर प्रकार का संबद्धिकरण समाप्त करते हुये ARP/ABRC पदों पर शिक्षकों को न रखा जाय।
8-अन्तर्जनपदीय स्थानांतरण में अध्यापको को उनके प्राथमिकता वाले पहले जिले में स्थानांतरित किया जाय तत्पश्चात जिले के अन्दर भी शिक्षक वर्ग का स्थानांतरण करते हुए उन्हें उनकी सुविधानुसार ब्लॉक व विद्यालय का आवंटन किया जाय।
9 - हर जिले की जिला कार्यकारिणी जनपद के उत्पीड़ित शिक्षको का अपने स्तर से स्वयं पता लगाकर उनकी लिस्ट तैयार करे और प्राथमिकता के आधार पर उसका समाधान कराया जाय। लोकल स्तर से समाधान न हो पाने की स्थिति में प्रदेशीय कार्यकारिणी को अवगत कराये , जिसके आधार पर प्रादेशिक टीम द्वारा सुनवाई करते हुए उचित कार्यवाही की जायेगी।
किसी भी रूप में अध्यापको को ऑफिसों, अधिकारियों, बाबुओं समन्वयकों और ARP के चक्कर लगाने, जी हजूरी करने,अर्थलाभ देने से रोक कर विभाग द्वारा किये जा रहे शिक्षको के शोषण व उत्पीड़न पर पूर्ण विराम लगाने हेतु प्रदेश नेतृत्व कटिबद्ध होगा।
उपरोक्त प्रस्तावों को पूर्ण समर्थन प्राप्त हुआ। लंच के उपरान्त अधिवेशन के दूसरे चरण में प्रदेशीय कार्यकारिणी के निर्वाचन की प्रकिया सम्पन्न हुई ।
जिसमें प्रस्ताव प्रक्रिया के तहत प्रदेशीय कार्यकारिणी का निर्वाचन चुनाव अधिकारी श्री मनीष कुमार त्रिपाठी (प्रधान सेवक निकेतन) की देख रेख में सर्वसम्मति से सम्पन्न किया गया। पहली बार संगठन में एक महिला को प्रदेश अध्यक्ष जैसे अहम और बड़े पद की जिम्मेदारी के निर्वहन के योग्य समझा गया है । इसलिए सभी शिक्षको की उम्मीदों की कसौटी पर खरी उतारना मेरी पहली प्राथमिकता होगी।एक महिला शिक्षक होने के नाते मेरी दोहरी जिम्मेदारी बनती है कि महिलाओं को भी आगे बढ़कर संगठन से जुड़कर शिक्षक हित मे समर्पित होने हेतु जागरूक करू।
क्योंकि बेसिक शिक्षा में महिलायों का प्रतिशत ज्यादा है और अधिकांश समस्याएं इन्ही महिलायों के इर्द-गिर्द घूमती हैं अगर इन समस्यायों के समाधान हेतू हम अपना 60-70% भी योगदान दें तो समस्यायों/मांगों का ग्राफ निरन्तर नीचे आएगा।
इसी सकारात्मक सोच के साथ मैं सभी शिक्षकों को विश्वास दिलाती हूँ कि आप सभी की समस्यायों/ उत्पीड़न में मेरे व आपके संगठन द्वारा सकारात्मक सहयोग किया जाएगा व तार्किक तरीके से ब्लॉकवार/जिलेवार समस्यायों का निस्तारण किया जाएगा।
इसके लिए हमारा संगठन आपके अमूल्य सहयोग की आकांक्षा रखता है, आप अपने जिले के नेतृत्वकर्ता से 25/- सदस्यता शुल्क जमा करके हमारी सदस्यता ग्रहण करे और जिले/ ब्लॉक कार्यकारिणी के गठन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले। किसी भी लीगल कार्यो के सम्पादन की कार्यवाही की औपचारिकता को लीगल तरीके से पूर्ण करें ,अपना प्रत्यावेदन रिसीव अवश्य कराये। किसी भी हाल में किसी को सुविधाशुल्क न दे ,कार्य न होने की दशा में ब्लॉक/जिला/प्रदेश नेतृत्व को लिखित रूप से अवगत कराएं।विद्यालय व विभाग के प्रति अपने उत्तरदायित्वो का निष्ठापूर्वक निर्वहन करे तभी संघ आपका सहयोग कर पायेगा।
अंत मे सबसे कहना चाहुगीं कि आज की विषम परिस्थिति को देखते हुए हम सभी को एक मंच पर आना होगा तभी हमारी एकता कायम रहेगी ।।जय शिक्षक एकता ,जय संघ
सुषमा (प्रदेश अध्यक्ष)
UPPSS-1160









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