कांके डैम संरक्षण समिति का चल रहा है तीन
वर्षों से आंदोलन: अब तक न सरकार को और
न हीं प्रशासन को पडा कोई फर्क
News 20 संवाददाताःगत 11 नवंबर 2018 को संरक्षक अमृतेश पाठक ने मंत्री जल संसाधन पेयजल एवं स्वच्छता विभाग झारखण्ड को एक पत्र प्रेषित किया था इस पत्र का विषय था कांके (गोन्दा) डैम के संरक्षण, सिमांकन समेत अन्य समस्याओं के संदर्भ में।
पत्र में अमृतेश पाठक ने मंत्री को यह बतलाया था कि कांके (गोन्दा) डैम रांची जिले के एक प्रमुख जलाशयों में से एक है यहां से रांची शहरी इलाके जिसमें कांके रोड कचहरी, अपर बाजार आदि है कि बड़ी आबादी को पेयजल की आपूर्ति होती है इसके अलावा वर्षों से डैम से जुड़े दर्जन भर गांव जिसमें हेसल, करंज टोली, बड़का टोली, लक्ष्मी नगर, पंडरा, सोसो, नवा सोसो, पतरागोंदा, हथयारगोंदा, टिकी टोली, मिशनगली, कठहलगोंदा आदि के सैकड़ों लोग मछली मारकर अपना व अपने परिवार का भरण पोषण करते हैं।
किन्तु हाल के वर्षों में कांके डैम का जल संचयन क्षमता घटता हीं जा रहा है, इसके अलावा जल में प्रदूषण का स्तर गंभीर स्तर तक पहुंच चुका है जिसके कारण जल में आॅक्सीजन का स्तर न्यूनतम मापदंड से काफी नीचे जा चुका है।
इस पत्र में कांके डैम संरक्षण समिति के संरक्षक अमृतेश पाठक ने अपनी निम्न मांगों को मंत्री जल संसाधन, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के समक्ष रखा जो निम्न है 1. कांके डैम तक सीधे पहुंचने वाले सभी नालों को चिन्ह्ति कर उसके डैम तक सीधे प्रवेश कर रोक लगाई जाए कचरा मुक्त पानी के सोधन के लिए बने प्लांट व पाईपलाईन जो वर्षों से बनकर तैयार है, अविलंब चालु किया जाए। 2. डैम की सिमांकन किया जाए औल चारों ओर हरे फुलदार वृक्ष लगाए जाएं ताकि डैम के क्षेत्र में कोई अतिक्रमण या अवैध घर का निर्माण न हो सके । 3. (क) डैम से जीविका उपार्जण करने वाले पतरागोंदा आदिवासी जलाशय मत्स्यजीवी स्वावलंबी सहकारी समिति लिमिटेड सैकड़ों लोगों को बृहत व व्यवसायिक मछली पालन या बतख पालन के लिए प्रशिक्षण के अलावा केज आदि की सुविधा देकर सहयोग किए जाएं।
(ख) पतरागोंदा व आस- पास की आबादी का सर्वे कराकर नगर निगम क्षेत्र में शामिल किया जाए। (ग) सोसो पतरागोंदा हथियागांेदा होते हुए कांके रोड तक बनने वाली प्रस्तावित सड़क का निर्माण अविलंब कराई जाए। स्थानीय रैयत (अब विस्थापित) जिनका जमीन डैम निर्माण में गया था उन्हें हीं प्राथमिकता के साथ डैम में मछली पालन व्यवसाय डैम की सुरक्षा, साफ- सफाई व वृक्षारोपण जैसे कार्य दिए जाएं इसके लिए पतरागोंदा ‘‘आदिवासी जलाशय मत्स्य जीवि स्वावलंबी सरकारी समिति लिमिटेड’’ नाम से एक संस्था का निबंधन भी किया जा चुका है। (ड़.) चटकपुर सोसो की तरफ जाने वाली पूल के समीप मत्स्य पालन के लिए मछली बिक्री और संबंधित रोजगार के लिए रोड निर्माण कराए जाएं। डैम को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए।
5. (क) डैम के हेसल देवी मण्डप रोड कटलगोंदा व सोसो की तरफ जाने वाली पूल के किनारे छठ घाट का निर्माण किया जाए क्योंकि बड़ी संख्या में यहां पर छठ ब्रतियों और श्रद्धालुओं का आना होता है। (ख) मूर्ति विसर्जन व अनुयायियों के लिए डैम के किनारे अलग से व्यवस्था बनाई जाए।
(ग) सरोवर नगर (डैम साइड प्राथमिक स्कूल) से सोसोपूर की तरफ जाने वाली सड़क को जोड़ा जाए ताकि देवी मण्डप रोड से सरोवर नगर होते हुए लोग सीधे- सोसो, चटकपुर की तरफ जा सकें तथा डैम से जुड़े मछली पालकों को भी बाजार उपलब्ध हो सके।
चटकपुर सोसो की तरफ आने वाले पूल के जुड़े मत्स्यपालकों के मछली बिक्री और संबंधित रोजगार के लिए रोड का निर्माण कराया जाए।
6. डैम की साफ- सफाई, सुरक्षा, डैम के किनारे किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि, कुड़ा- कचरा फेंकने पर रोक लगाई जाए तथा पौधों की देखभाल आदि डैम से जुड़े किसी भी कार्य को करने व देख भाल के लिए एक स्थानीय समिति को मान्यता दी जाए तथा रांची नगर निगम की ओर से संसाधन उपलब्ध कराई जाए। उपरोक्त पत्र की प्रतिलिपि मंत्री सचिव नगर विकास पथ परिवहन मकान निर्माण, तथा मंत्री सचिव खेल कुद युवा कार्य संस्कृति पर्यटक विभाग, एवं मंत्री कृषि एवं पशुपालन विभाग झारखण्ड और निदेशक मत्स्यपालन विभाग, उपायुक्त रांची, मेयर रांची नगर निगम, नगर आयुक्त रांची नगर निगम, अपर नगर आयुक्त रांची नगर निगम, चिकित्सा पदाधिकारी रांची नगर निगम। दिलचस्प बात तो यह है कि उक्त पत्र के लगभग 3 वर्ष होने को है और कांके डैम की स्वच्छता को लेकर कांके डैम संरक्षण समिति द्वारा आजतक आंदोलन चलाया जा रहा है परन्तु सरकार और स्थानीय प्रशासन ने कांके डैम संरक्षण समिति के अबतक के आंदोलन को तवज्जो नहीं दे रही है जो आश्चर्य का विषय है।

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