पङोसी राज्य बंगाल विद्युत व्यवस्था को
लेकर काफी सक्रिय होकर आपूर्ति
करने मे सफल
कैसे है :प्रिंस गुप्ता, प्रखंड अध्यक्ष
भाजयुमो, बरहेट
आखिर बरहेट प्रखंड में बिजली व्यवस्था
में क्यों नहीं हो रहा है सुधार
"News 20" के लिए बरहेट से मालिक अख्तर की रिपोर्ट :
बरहेट प्रखंड के विद्युत आपूर्ति को लेकर लगातार लोगों की क्रोध बढ़ता जा रहा है।
इतनी उमस भरी भयंकर गर्मी ने एक सप्ताह से लोगों की जन जीवन अस्त व्यस्त कर रखा है। इस भीषण गर्मी में लोग अपना काम तो दुर चैन से बैठने तक के मुहाल हो गये है। सुधार के नाम पर शुक्रवार व रविवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 3 बजे तक आपूर्ति वाधित होने के नाम से लोगों राहत मिली कि दो दिन की कुर्बानी में आगे के लिए फायदेमंद होगा ये सोचकर लोगों ने बेचैनी से राहत नजर आ रहा था।
लेकिन दोनों दिन पूरा दिन बिजली गायब होने पर भी जनता का कोई सवाल खड़ा नहीं हुआ। परन्तु अभी कौन सा मुसीबत है जो दिन भर आँख मिचौली कर रात को रोटेशन का जुल्म सहो उसके बाद जिसे रोटेशन में 12 बजे के बाद बिजली मिलने का समय पॉवर हाउस कर्मी देते हैं वो बेचारा 12 बजे तक लाइट का इंतेज़ार कर सोता नहीं है और बाहर सड़क पर कुदरती हवा लेकर टहलते हुए समय गुजरता है क्योंकि उस उम्मीद है 12 बजे के बाद लाईट आएगी और वो आराम से सोए।
परन्तु आज 3 दिन से 1 बजे के बाद बिजली कटने के बाद सुबह 6 बजे के बाद बिजली मिलता है। पॉवर हाउस कॉल करने पर पता चलता है कि पॉवर ग्रिड से कटा हुआ है इसलिए कुछ बोला नहीं जा सकता है।
इस उधेड़बुन में लोगों को नींद हराम होते होते अनिद्रा चिड़चिड़ेपन का शिकार होने से कोई नहीं रोक सकता है।
नींद एक मानव जीवन का महत्वपूर्ण अंग है जो चिकत्सक के सलाह अनुसार ये प्रकृतिक का दिया हुआ एक नियम है जिसमें व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 6 घंटे का नींद लेने की आवश्यकता है।
लेकिन हाय रे मजबूरी , क्या कारण है जो इस व्यवस्था को दृढ़ करने में विभाग हमेशा नाकाम साबित होता है। भाजपा युवा मोर्चा बरहेट के प्रखंड अध्यक्ष प्रिंस गुप्ता बिजली की लचर व्यवस्था पर खेद जताते हुए कहा कि पड़ोसी राज्य बंगाल विद्युत व्यवस्था को लेकर काफी सक्रिय होकर आपूर्ति करने में सफल कैसे है, और झारखंड की धरती को सोने का टुकड़ा ऐसे ही नाम नहीं रखा गया है क्योंकि झारखंड की धरती पर खनिज संपदा अधिक मात्रा में पाया जाने के कारण, कोयला, अबरख, तांबा, कॉपर इत्यादि जैसे चीजों का निर्यात झारखंड से होकर अन्य राज्य को उपलब्ध कराते हैं। विद्युत उत्पन्न के लिए प्रतिदिन हजारों टन कोयला इसी धरती से होकर गुजरता है, और अंधकार में इसी धरती का निवास करने वाले प्राणी आज वर्षों से अपना जीवन यापन कर रही है।
झारखंड प्रदेश को सोने का चिड़िया का भी खिताब हासिल किया है , मगर ये सिर्फ सुनने और इतिहास के पन्नों में लहलहाने के लिए सिर्फ अच्छा है वरना आज यहां की जनता विद्युत आपूर्ति के लिए इतना संघर्ष नहीं करना पड़ता।


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