प्रेम चंद पर विशेष
हे उपन्यास के महा सम्राट
तुम को वंदन करता हूं
गांव की पीड़ा पिरोकर तुम ने
साहित्य अनूठा रचा
गांव लमही की
कुटिया में रह कर
अनगिनत उपन्यास रचा
गांव टी नाम का आधार बना
महिला पुरुषों के
दुख दर्द को उभारा
गांव की पीड़ा को
जन-जन तक पहुंचाया
देश-विदेश चहुंओर
भारत का मान बढ़ाया
लेखनी से अपने
लोगों को जागृत करने का
अतुलनीय प्रयास किया
हे उपन्यास के महा सम्राट
तुम को वंदन करता हूं
विनोद कुमार सीताराम दुबे
शिक्षक व हिन्दी प्रचारक
भांडुप मुंबई महाराष्ट्र

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