हमारा निश्चय दृढ़ है।ना झुकेंगे,
ना टूटेंगे- भूरैयत
शशि पाठक
टंडवा (चतरा) विगत 11 माह से एनटीपीसी के विरुद्ध 6 गांवों के भू-रैयतों का आंदोलन अब और भी धारदार होने लगा है।अपने त्रि-सूत्री मांगों में मुख्य रूप से बड़कागांव के तर्ज पर 20 लाख रुपए करने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठकर अपनी जान की बाजी लगा रहे अनशनकारियों के बीच भूरैयतों ने रविवार को अनशन तुड़वाकर पांच नए लोग धनंजय सोनी,नरेश महतो, गंगाधर रजक,यदु महतो एवं भीम नारायण ठाकुर अनशन पर बैठ गए। भूरैयतों का कहना है कि अपनी मांगों को लेकर हमारा निश्चय दृढ़ है,ना हम टूटेंगे ना झुकेंगे। इस लोकतांत्रिक देश में गांधीवादी विचारधाराओं का अपमान इससे बड़ा नहीं हो सकता है। सत्य, अहिंसा और आंदोलन के सहारे अपने न्यायोचित मांगों को लेकर जान की बाजी लगाने पर भी सरकार और प्रबंधन का मौनव्रत अब भी टूटने का नाम नहीं ले रहा,यह दुर्भाग्यपूर्ण है। दिलचस्प आंकड़े तो यह है कि चंद दूरी पर दोधारु नीति अपनाने से एनटीपीसी की किरकिरी आमजनों में शुरू हो गई है। वहीं दूशरी ओर, विस्मय की बात तो यह है कि केंद्र सरकार का यह उपक्रम को भारी कर्ज के बोझ तले प्रतिदिन पौने दो करोड़ ब्याज चुकाते हुवे अरबों का नुक़सान स्वीकार है पर महज एक दिन का ब्याज से किसानों को भरपाई करने का तरीका मंजूर क्यों नहीं इसकी पुरजोर चर्चा होने लगी है। हालांकि, देखा जाए तो प्रबंधन हो रहे भारी नुक़सान की भरपाई सरकारें जनता की गाढ़ी कमाई से हीं तो करेगी।
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