सीसीएल के आम्रपाली परियोजना में अधिकारियों की लापरवाही

सीसीएल के आम्रपाली परियोजना में 

अधिकारियों की लापरवाही

♦ 2019 में बगैर वन भूमि का अनापत्ति लिए कराया अतिक्रमण,

 तीन सालों तक सरकारी राजस्व का लगा अरबों का चूना।

♦ 22 दिसंबर को परियोजना कार्यालय की ओर अनापत्ति के पहल 

पर उठते सवालों में उलझा सीसीएल





ब्यूरो रिपोर्ट।

टंडवा (चतरा) प्रखंड क्षेत्र में सीसीएल द्वारा संचालित आम्रपाली कोल परियोजना के द्वारा बरती गई अनियमितता की चर्चा इन दिनों सुर्खियों में है, जिससे सरकार को अरबों रुपए के नुकसान होने का अनुमान है। प्रबंधन ने होन्हे के रैयतों का 25 प्लॉटों सहित वनभूमि में बगैर अनापत्ति लिए सड़क निर्माण पूर्व में कराई गई जिसपर उठे विवादों के कारण अब आनन-फानन में अनापत्ति की प्रक्रिया प्रारंभ की गई है।सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर सीसीएल अपने निविदा नम्बर CCL/GM(CMC)/AC/2021/12 दिनांक 12-03-2021 में 1.7 कि.मी. सीसीएल का बगैर वन भूमि अनापत्ति के कैसे निर्माण कराया गया। वहीं उठते सवालों के बीच अब अपनी गर्दन को बचाने के लिए आनन फानन में होन्हे तथा नौडीहा के रैयतों का जमीन साथ हीं नौडीहा के वन क्षेत्र को अधिग्रहण करने के लिए परियोजना कार्यालय की ओर से दिनांक 22 दिसंबर 2021 को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार से अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए प्रस्ताव संख्या : FP/JH/ENCRH/150436/2021 रकबा लगभग 8.94 हेक्टेयर बगैर वन अधिकार ग्राम समिति की सहमति के ऑनलाइन पोर्टल परिवेश में आवेदन किया है।माना जा रहा है कि सीसीएल ने आम्रपाली से शिवपुर रेलवे साइडिंग तक कोयले की ट्रांस्पोर्टिंग में हमेशा से शिवपुर रेलवे साइडिंग को लीज होल्ड एरिया के अंदर बता कर 2019 से वर्तमान समय तक खनन विभाग तथा वन विभाग को राजस्व देने से बचता रहा है। अब वर्तमान समय में सीसीएल की चोरी-चुपके निकाले गए निविदा तथा आरटीआई के माध्यम से मिली जानकारी पर जब खुलासा हुआ तो उसी मार्ग में 1.7 किमी की अधिग्रहण की प्रक्रिया को तेज कर दिया गया है। अब जब सच्चाई सबके सामने आ हीं गया है तो सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर 2019 से बगैर ट्रांसपोर्ट चालान के कोयले की ढुलाई कैसे हो गया। जबकि झारखंड सरकार के खनन विभाग के अनुसार खनन क्षेत्र के बाहर किसी भी प्रकार का खनिज संपदा को ले जाने के लिए ट्रांसपोर्ट चालान बनाना अनिवार्य होता है। साथ हीं प्राप्त जानकारी के अनुसार सीसीएल द्वारा वन विभाग का ट्रांजिट चालान का भी कर नए नियम के अनुसार नहीं देने के कारण करोड़ों रुपए का सरकारी राजस्व के क्षति का अनुमान है। वहीं इस अनियमितता के जिम्मेदार लोगों से सरकार नुकसान की भरपाई आखिर कैसे करेगी? यह सवाल लोगों के जेहन में दौड रहा है।

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