नई दिल्ली(पी एम ए)कोरोना संक्रमण ने खर्च पर लगाम लगाने की कवायद में रेलवे में अंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे हैं मैसेंजर सेवा को समाप्त करने का निर्णय लिया गया है ।इस ऐतिहासिक निर्णय से गोपनीय दस्तावेजों को डांक संदेशवाहक के जरिए की जाने वाली परंपरा समाप्त हो जाएगी। इस पद पर तैनात रहने वाले डाक संदेश वाहक कर्मचारियों को अब नहीं रखा जाएगा। अंग्रेजों के जमाने में रेलवे बोर्ड से लेकर जोनल रेलवे मंडल रेलवे और अन्य कारखानों में एक संदेश वाहक का पद सृजित था। इस कर्मचारी का काम गोपनीय दस्तावेजों को लेकर विभिन्न कार्यालयों में जाना होता था। लेकिन आज के डिजिटल दौड़ ने ईमेल और इंटरनेट में इंजनों को समाप्त कर दिया है। हालांकि पूरे भारतीय रेलवे में इनकी संख्या 100 से भी बहुत कम होगी। इससे इन कर्मचारियों के भत्ते/ स्टेशनरी और अपेक्षा अधिक खर्च में बचत होगी। फिर भी रेलवे ने इन पदों को समाप्त करके खर्च बचत करने की पहल जरूर है।

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