अपनी बात: इस पोस्ट का उद्देश्य किसी को भी
अपमानित या हतोत्साहित करना नहीं है-संतोष दीपक
श्री प्रकाश कुमार गुप्ता जी मेरे एक परिचित हैं जो राजधानी रांची में रिम्स के कोविड वार्ड में पिछले चार-पांच दिनों से एडमिट हैं. वहां पर प्रॉपर तरीके से देखभाल नहीं हो पा रही है.
इस पोस्ट का उद्देश्य किसी को भी अपमानित या हतोत्साहित करना नहीं है लेकिन माननीय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी से अपील है और उससे भी अधिक हाथ जोड़कर विनती है कि अपनी प्रबंधन क्षमता एवं मानवीयता का परिचय देते हुए कृपया रिम्स के कोविड वार्ड और राज्य के अन्य सभी कोविड अस्पतालों की व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करें.
वास्तविकता यह है कि राजधानी रांची सहित पूरे झारखण्ड में कोविड की गंभीर दस्तक पड़ चुकी है और बिना किसी भेदभाव या राजनीतिक-सामाजिक मतभेद के मुकाबला करना बहुत जरूरी है अन्यथा अगला नम्बर हम सभी का है.
अपने परिचित कोरोना मरीज़ श्री प्रकाश कुमार गुप्ता जी की स्थिति को आपके साथ साझा कर रहा हूँ और आप सभी से अपील है कि अपने-अपने स्तर पर ना केवल प्रकाश जी बल्कि सभी मरीज़ों की अधिक-से-अधिक सहायता के लिये सामने आये. आप सभी से हाथ जोड़कर यही प्रार्थना है. साथ ही रिम्स के कोविड वार्ड की कुछ तस्वीरें भी मिली है जो मन को विचलित और बेचैन करती है और उसे भी पूरी गंभीरता के साथ मैं पोस्ट कर रहा हूँ. इस विश्वास के साथ कि परिणाम सकारात्मक और बेहतर होगा.
कोरोना वारियर्स देवतुल्य अपने डॉक्टर्स की बातों को अभी अलग रखता हूँ. जानकारी के अनुसार स्थिति यह है कि 3 दिन पहले दोपहर में खाना भी नहीं दिया गया, उनसे फोन पर बात करने पर यह बात पता चला। फिर हम लोगों ने वहां के administration से बात की तब जाकर शाम 5:00 बजे खाना दिया गया साथ ही यह आश्वासन भी दिया गया कि आगे से ऐसी कोई दिक्कत नहीं होगी.
परन्तु पुनः कल रात फिर वही समस्या, ना खाना दिया गया ना पानी. आज सुबह 10:00 बजे तक ना नाश्ता दिया गया ना पानी.
कल रात से आज सुबह 10:00 बजे तक प्रकाश जी लगातार पानी मांगते रहे पर कोई सुनने वाला नहीं.
एक कोविड मरीज पहले से ही मानसिक रूप से त्रस्त है और वह लगातार पीड़ा झेल रहा है. शारीरिक-मानसिक रूप से बेहद परेशान ऐसे मरीजों के साथ में यह व्यवहार बिल्कुल उचित नहीं है. एक पीड़ित के प्रति यह अमानवीय है। कृपया उन मरीज़ो की जगह पर स्वयं को रखकर देखें.
दुर्भाग्य से मुम्बई-दिल्ली-गुजरात जैसी परिस्थिति बनती जा रही है अपने झारखण्ड में जहाँ व्यवस्था के अभाव, अकुशल प्रबंधन और संवेदनहीनता के अभाव में ही लोगों की जान चली जाएगी.
ध्यान देने की बात यह भी है कि पहले से ही कोविड मरीज़ों का आत्मविश्वास डगमगाया हुआ है. ऊपर से अधिकांश के घर के सदस्य व नज़दीकी रिश्तेदार कोरेेन्टीन (एकांतवास) में हैं. वैसे बीमार लोग अपना दर्द-अपनी बात साझा नहीं कर सकते और ना ही अपनों से सहायता की गुहार लगा सकते हैं.
अतः आप सभी से अनुरोध है इस गंभीर समस्या के निदान हेतु कार्रवाई करें. यकीन करें. अपने झारखण्ड में बहुत अधिक शक्ति और संवेदनशीलता है और मुझे विश्वास है कि हम झारखण्ड के लोग, कोरोना के विरुद्ध इस लड़ाई को जरूर जीतेंगे.
मेरे परिचित श्री प्रकाश गुप्ता जी, पुत्र स्वर्गीय ज्योतिष प्रसाद गुप्ता को सांस लेने में भी गंभीर समस्या है और केवल रिम्स की बात करूँ तो वहाँ अनेक कोविड मरीज़ों की स्थिति गंभीर है. आपसे विनम्र अनुरोध है कि मेरे परिचित प्रकाश जी एवं अन्य सभी मरीज़ों की अपने स्तर पर अधिकतम मदद करें. आज यही मानवता, संवेदनशीलता और समय की माँग है.
यदि हम अपना योगदान देने में अब भी चूक गये तो ना तो आनेवाला समय हमें माफ़ करेगा और ना ही हम अपने-आपको. *संतोष दीपक अखिल भारतीय कायस्थ महासभा झारखण्ड प्रदेश*

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