कला व साहित्य के माध्यम से समाज की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करें : गोखले

कला व साहित्य के माध्यम से समाज की 

चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करें : गोखले 



हजारीबाग रिपोट -आशीष कृष्णन 

कला एवं साहित्य के क्षेत्र में काम करने वाली संस्कार भारती की दो दिवसीय प्रांतीय साधारण सभा ऑनलाइन संपन्न हुई। दो दिवसीय संपन्न ऑनलाइन साधारण सभा में राज्य के डेढ़ दर्जन समितियों एवं प्रान्त के अधिकारियों सहित 80 से अधिक अपेक्षित प्रतिनिधि शामिल हुए। इस कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता अखिल भारतीय संगठन मंत्री अभिजीत गोखले शामिल हुए। श्री गोखले ने कहा कि कला व साहित्य के माध्यम से समाज की चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत किए जाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि संस्कार भारती कलाकारों का संगठन है यह जन संगठन नहीं है। ऐसे में कला एवं साहित्य के माध्यम से हमें समाज की समस्याओं के समाधान का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि कलाकारों से संपर्क व संवाद कर उन के माध्यम से प्रस्तुति के द्वारा समाज में विचारों को व्यक्त करना जरूरी है। अखिल भारतीय संगठन मंत्री ने कहा कि कला क्षेत्र भारतीय चिंतन के आधार पर चले, इस दिशा में सोचने और कार्य करने की जरूरत है। उन्होंने समाज की चुनौतियों की चर्चा करते हुए कहा कि यह सही है कि देश में हिंदुत्व विचारधारा का प्रभाव बढ़ रहा है, लेकिन हिंदू मूल्यों का क्षरण हो रहा है। परिवार व्यवस्था हमारी विशेषता रही है, पर्यावरण रक्षा हमारे महत्वपूर्ण आयाम रहे हैं, लेकिन इन दोनों में इन दिनों गिरावट आ रही है। ऐसे में समाज को सकारात्मक दिशा देने की जरूरत है। हम कला के माध्यम से इस दिशा में अपना योगदान दे सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कवि सम्मेलन, नाटक के मंचन के पीछे हमारा चिंतन समाज के सापेक्ष होना चाहिए। वर्तमान में राज्य की सरना जनजाति को हिंदुओं से काटने के प्रयास की चर्चा करते हुए कहा कि एक षड्यंत्र के तहत यह कार्य किया जा रहा है। कला के माध्यम से सरना जनजाति में हिंदू विचारों का समावेश और प्रभाव विषय पर प्रदर्शन के माध्यम से परिलक्षित किया जाना चाहिए। प्रारंभ से ही सरना समाज हिंदू विचारों का न केवल संरक्षक रहा है बल्कि इसका वाहक रहा है। साथ ही हिन्दू समाज के समक्ष आने वाली चुनौतियों के समाधान में भी सरना समाज सहभागी ही नहीं आगे बढ़कर काम करता रहा है। आज षड्यंत्र के तहत इसे हिंदुओं से काटने का प्रयास किया जा रहा है।


उन्होंने कार्यकर्ताओं से कला एवं विधा के विस्तार के लिए नए नए कार्यक्रम लेने की आवश्यकता जताई, इसके लिए संगठन के लोगों से कार्य करने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में हम वैचारिक कुरुक्षेत्र में खड़े हैं, ऐसे में हमें भारतीय परंपरा व चिंतन पर आधारित कला की प्रस्तुति कर लक्ष्य की ओर तेज गति से बढ़ने का काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपरा व चिंतन पर आधारित कला का विकास हमारा लक्ष्य है। इसे ही हमें अपनी पहचान बना कर काम करने की जरूरत है। उन्होंने वैश्विक महामारी कोरोना के दौर में भी संगठन द्वारा अपने अपने स्तर से कला एवं सेवा के क्षेत्र में किए गए कार्यों के लिए बधाई दी।

कार्यक्रम में प्रदेश महामंत्री संजय कुमार श्रीवास्तव ने पिछले 1 वर्ष में पूरे प्रांत में हुए कार्यक्रमों का ब्यौरा दिया। उन्होंने बताया कि कोरोना काल में भी ऑनलाइन कई कार्यक्रम किए गए। कलाकारों की स्थितियों को ध्यान में रखते हुए उनकी जरूरतों को कुछ हद तक पूरा करने का काम संगठन के कार्यकर्ताओं ने किया। प्रांत कोषाध्यक्ष सरवनी सिन्हा ने पिछले वर्ष की आय व्यय का लेखा जोखा प्रस्तुत किया। साथ ही अगले वर्ष का बजट प्रस्तुत किया। प्रांत के नाट्य विधा प्रमुख डॉ अजय मलकानी ने झारखंड के नाटकों में लोक तत्व विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि झारखंड में लोक धर्मी एवं नाट्य धर्मी दोनों शैली नाटकों में प्रचलित रही है। कार्यक्रम में राष्ट्रीय मंत्री अशोक तिवारी, क्षेत्र प्रमुख बिंदेश्वरी प्रसाद चौरसिया, सह क्षेत्र प्रमुख डॉ संजय कुमार चौधरी, प्रांत अध्यक्ष पद्मश्री पंडित गोपाल दुबे, कार्यकारी अध्यक्ष उमेश मिश्रा, उपाध्यक्ष राकेश रमन, इंद्रजीत सिंह, मंत्री संगठन शाद्वल कुमार, प्रदेश मंत्री डॉ सुशील अंकन, नीरज श्रीधर, संगीत विधा प्रमुख मथुरेश कुमार वर्मा, डॉ नथुनी पांडे, ब्रह्मानंद दसौंधी, अनीता सिंह सहित विभिन्न इकाइयों के अध्यक्ष, मंत्री, मातृशक्ति प्रमुख, कोषाध्यक्ष व मंत्री संगठन ने भाग लिया।कार्यक्रम के समापन के पूर्व ख्याति प्राप्त शास्त्रीय गायक पंडित जसराज सहित कई अन्य कलाकारों, संस्कार भारती के पूर्व पदाधिकारियों के असामयिक निधन पर 1 मिनट का मौन रखते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। अभिषेक सूर्य के वंदे मातरम के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

संगठन में किए गए कई बदलाव दो दिवसीय ऑनलाइन प्रांतीय साधारण सभा के दौरान ही संगठन में कई लोगों को दायित्व सौंपा गया। रांची के आशुतोष प्रसाद को प्रांतीय साहित्य विधा का सह प्रमुख बनाया गया, वही गुमला के शंकर नायक को लोक कला विधा का सह प्रमुख, हजारीबाग के चार्टर्ड अकाउंटेंट विकास कुमार वर्मा को प्रांत के सह कोषाध्यक्ष बनाए गए। जमशेदपुर के देवव्रत बनर्जी प्रांत की कार्यकारिणी में बतौर सदस्य शामिल किए गए। धनबाद में मृणमय सरकार को जिला प्रमुख बनाया गया, वही विवेक कुमार मिश्र मेदिनीनगर के जिला प्रमुख बने। आनंद प्रकाश गढ़वा के डंडई इकाई के संयोजक बनाए गए, वहीं मेदिनीनगर के ही चैनपुर में उमेश कुमार गुप्ता को, छिपादोहर में पुष्पा देवी को संयोजक बनाया गया। चतरा में प्रवीण कुमार दुबे संयोजक बने, वही जोरी में सोनल पांडे संयोजक बनाए गए। धनबाद के गोमो में वासुदेव चक्रवर्ती संयोजक बने, जोड़ापोखर में श्रीमती संविता मुखर्जी संयोजक बनी, निरसा में रूमा चंद्रा संयोजक बनाई गई।

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