पूर्ण विश्वास है झारखंड के छात्रों को हाइकोर्ट से मिलेगा न्याय- जेपीएससी अभ्यर्थी उमेश प्रसाद

पूर्ण विश्वास है झारखंड के छात्रों को हाइकोर्ट से 

मिलेगा न्याय- जेपीएससी अभ्यर्थी उमेश प्रसाद

जेपीएससी का इतिहास विवादों से गहरा नाता रहा है , आरंभ से ही ये अपने कुकृत्यों के चलते हमेशा मेघावी छात्रों को दरकिनार करते ही आ रहा है इसी को लेकर झारखंड के तमाम जिले के छात्र व निवासियों ने भी छठी जेपीएससी को रद्द करने के लिए समर्थन कर रहे हैं ।
जैसा विदित है कि छठी जेपीएससी का फाइनल रिजल्ट 21 अप्रैल को घोषित किया गया है जिसके उपरांत अनेकों गड़बड़ियां उजागर हो रही हैं , अभ्यर्थी उमेश प्रसाद के नेतृत्व में रद्द को लेकर आरंभ से ही आंदोलन किया जा रहा है । 
उक्त परीक्षा पर घोर अनियमितताएं हुई है जैसा संज्ञान में आया है कि क्वालिफाइंग पेपर (हिंदी व अंग्रेजी) के मार्क्स को जोडकर मुख्य परीक्षा का रिजल्ट जारी किया है, जबकि 100 अंकों वाली हिंदी व अंग्रेजी की परीक्षा में अभ्यर्थीयों को केवल 30 मार्क्स लाना अनिवार्य था, इसका प्राप्तांक मेरिट लिस्ट में नहीं जोडने का उल्लेख है ऐसा सिविल सेवा के लिए गठित बी. एस. दुबे कमिटी के आने पर जेपीएससी 02 अप्रैल 2013 को एक बैठक कर निर्णय लिया गया था कि मुख्य परीक्षा का प्रथम पत्र पर क्वालिफाइंग रहेगा तथा इसके प्राप्तांक को मेरिट लिस्ट में नहीं जोडा जाएगा जो साबित होती है कि आयोग अपने मुताबिक रिजल्ट करता जो असंवैधानिक है 
अभ्यर्थियों का कहना है कि छठी जेपीएससी का पीटी रिजल्ट 23-01-2017 में आने के बाद से ही आरंभ हो गई थी इसलिए कि सामान्य वर्ग से अधिक अंक लाने के बावजूद भी बीसी-1 एंव 02 के अभ्यर्थियों को असफल घोषित कर दिया जाता है जिसके फलस्वरूप पिछड़े वर्ग के अभ्यर्थी आंदोलन करते हैं तत्पश्चात सफल घोषित किया जाता है लेकिन कैटेगरी में ही रखा जाता है जो नियमत: गलत है,इन अभ्यर्थियों को अनारक्षित वर्ग मे ही सम्मिलित करना था जो प्रथम से चतुर्थ जेपीएससी में करते आक रहा है
अभ्यर्थी उमेश प्रसाद का कहना है कि छठी जेपीएससी का रिजल्ट संपुर्ण प्रकिया ही गलत है चुंकि ये विज्ञापन का उल्लंघन किया गया है, छठी के विज्ञापन मे स्पष्ट उल्लेख हैै कंडिका -12(ए) कि पीटी के आधार पर कोटिवार रिक्तियों के संख्या के 15 गुणा उम्मीदवारों की मुख्य परीक्षा के लिए आरक्षण सहित शार्टलिस्टिंग किया जाएगा लेकिन परीक्षा के उपरांत रिजल्ट दो बार घोषित किया जाता है जो अभ्यर्थी 15 गुना से 18 गुना हो जाती है जो सीधा उल्लंघन है सुप्रीम कोर्ट के *सिविल अपील नं- 4255-58/2014* का उल्लंघन है यदि सुप्रीम कोर्ट मे मामला जाती है तो छठी जेपीएससी पूरी प्रकिया ही रद्द करने का आदेश दिया जाएगा।। इसलिए मौजूदा समय मे हाईकोर्ट में रद्द को लेकर 35 रिट दायर कर चुके हैं और ऐसा उम्मीद है कि फैसला छात्रों के हित में आयेगा।
अभ्यर्थी रीना सिंह का आरोप है कि आयोग आरंभ से ही प्रथम जेपीएससी से षष्ठम् तक अति विवादास्पद बनी हुई है जैसा विदित है कि विधि या नियमावली बनाना विधायिका काम है ना कि आयोग को लेकिन आयोग बारंबार पीटी से इंटरव्यू तक नियमावली को छेडछाड किया गया है छठी मे,जो स्पष्ट दृष्टिपात होता है कि आयोग असक्षम है परीक्षा आयोजन कराने में इसलिए राज्य सरकार से दरख्वास्त हैं कि *जेपीएससी को भंग करके यूपीएससी को सौपा जाए ।
जेपीएससी अभ्यर्थीयों मे पंकज मौर्या, शाहिद अनवर, मनोरंजन, रानी कुमारी, राजेश गुप्ता, प्रभुदयाल लकडा, कुलदीप मुंडा, अजय झा, सचिन, सतीश, अमित लाल व सैकड़ों अभ्यर्थियों ने माननीय न्यायालय से विनम्र निवेदन किये है कि अविलंब छात्र हित को देखते न्याय दें ।

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