इतिहास के पन्नों से:आरएसएस के दुसरे गुरु गोलवलकर के पुस्तक बंच ऑफ थॉट्स आर्थात बिचारो का गुच्छा का मुख्य अंश

इतिहास के पन्नों से:आरएसएस

 के दुसरे गुरु गोलवलकर के 

पुस्तक बंच ऑफ थॉट्स आर्थात

 बिचारो का गुच्छा का मुख्य अंश



जिस प्रकार जर्मनी के तानाशाह एडोल्फ हिटलर ने संगठन तैयार किया था और जर्मनी के जमींदार वर्ग, अमीर वर्ग,, पूंजीपति वर्ग और उच्च वर्ग के लोगों ने हिटलर को सरकार बनाने में और तानाशाही लागू करने में मदद किया था उसी तरह इटली के तानाशाह मुसोलिनी को भी वहां के लोगों ने संगठन बनाने में तानाशाही लागू करने में फांसीवादी नीति को लागू करने में लोकतंत्र समाप्त करने में और एकतंत्रीए तानाशाही शासन की स्थापना में मदद किया था उसी प्रकार भारत में आर एस एस का भी गठन किया गया।

 आर एस एस के विचार बिल्कुल हिटलर और मुसोलिनी से मिलता-जुलता ही नहीं है बल्कि उनके तानाशाही और फासिस्ट स्वयंसेवकों के तरह आर एस एस के स्वयंसेवक भी तैयार किए जाते हैं। विजयदशमी के दिन 27 सितंबर  1925 को आर एस एस की स्थापना केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी और उसका मकसद भारत में एकतंत्रीए शासन यानी कि तानाशाही शासन की स्थापना और हिटलर और मुसोलिनी के तरह नस्ल भेद और जाति भेद के आधार पर शासन व्यवस्था कायम करने का रणनीति तैयार किया जाता है ।

आर एस एस के दूसरे गुरु माधवराव सदाशिव राव गोलवलकर ने आर एस एस को हेडगेवार के बाद अमीर वर्ग पूंजीपति वर्ग जमींदार वर्ग और  उच्च वर्ग के लोगों को एकत्रित कर संगठन को पूरे देश में फैलाया  ।

आर एस एस भारतीय संविधान जो बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर द्वारा तैयार किया गया है कोई नहीं मानता है, आर एस एस का संविधान मनु स्मृति है आर एस एस का राष्ट्रीय झंडा तिरंगा नहीं बल्कि भगवा ध्वज है और कानून मनु आचार संहिता है।आरएसएस ने अपने स्थापना के 95 वर्षो के बाद भी आज तक निबंधन नहीं कराया है और नाहीं कोई सदस्यता रसीद ही छपवाया है।

 गोलवलकर ने बहुत सारे विचार अपने स्वयं सेवकों के बीच में रखा है और उन सभी विचारों को एकत्रित कर एक पुस्तक के रूप में प्रकाशित कराया जिसे बंच ऑफ थॉट्स अर्थात विचारों का गुच्छा  नामकरण किया । यह पुस्तक 1966 में बंगलोर मे प्रकाशित हुआ , गोलवलकर का यह विचार कि भारत में मुसलमान ,ईसाई और साम्यवादी खतरे के रूप में है यहां तक की भारतीय ईसाइयों को गोलवलकर खून चूसने वाले मानते थे। उनकी पुस्तक बंच ऑफ थॉट्स अर्थात विचारों का गुच्छा में मुख्यरुप से निम्नलिखित बातें हैं पहला अशोक चक्र वाला तिरंगा नहीं बल्कि भगवा ध्वज हमारा राष्ट्रीय ध्वज हो , दूसरा जमीदारी प्रथा और राजाओं के राज्यों को खत्म घोषित करना एक भयंकर भूल थी तीसरा संसदीय लोकतंत्र भारतीय जनमानस के लिए उचित नहीं है चौथा समाजवादी विचारधारा विदेशी विचारधारा है पांचवा भारत का संविधान जहरीला बीज है छठा सभी विधानसभाओं और राज्य सरकारों को समाप्त घोषित कर भारत की सरकार एकतंत्रीए अर्थात तानाशाही होनी चाहिए सातवा जब तक ईसाई मुस्लिम हिंदुत्व स्वीकार नहीं करते तब तक उनके साथ दुश्मन की तरह बर्ताव करना चाहिए आठवां प्राइवेट स्कूलों में कम से कम एसटी, एससी और ओबीसी के बच्चों को दाखिला दिया जाना चाहिए नौवां सरकारी स्कूलों में कम से कम पढ़ाई करना और बिना पढ़ाई के ही  एसटी, एससी और ओबीसी के बच्चों को पास करना ताकि को नकारा हो जाए और आगे स्पर्धा या कंपटीशन में पास नहीं कर पाए दसवां शिक्षा का भगवाकरण किया जाए ग्यरहवां एससी एसटी और ओबीसी समाज के खूब पढ़े लिखे और कामयाब लड़कों से अपनी बेटियों की शादी करना ताकि दलित लड़के अपने समाज और मां-बाप से दूर रहें अगर वह बात नहीं माने तो उसे झूठे दहेज के केस में फंसा देना और जेल भेजवा देना।

बारहवां एससी एसटी और ओबीसी लड़कियों को प्रताड़ित (मुल शब्द को नहीं लिख रहा हूं क्योंकि वह बहुत ही गंदा शब्द है) करना और उन्हें मजबूर कर देना तेरहवां हिंदुओं के हर छोटे से छोटे  पर्व  का खूब प्रचार प्रसार और बड़े पैमाने पर मनाना इन सब पर ज्यादा से ज्यादा सरकारी राशि खर्च करवाया जाना चाहिए 14वां एससी एसटी और ओबीसी मुहल्लों में और बस्तियों में हिंदू मंदिर बनवाया जाए आरक्षण विरोधी प्रचार जोर-शोर से किया जाए  पन्द्रहवां एससी एसटी और ओबीसी बस्तियों में दारू के ठेके खोलना ताकि वह ज्यादा से ज्यादा नशे की लत में पड़े रहे  सोलहवां गांवों और बस्तियों में पाइप लाइन के बजाय टैंकरों से पानी भेजा जाए ताकि वह आपस में ही लड़ते रहे और सिर्फ फुटबॉल करते रहे  सत्रहवाँ ध्यान रहे इनकी एकता खंडित रहे और यह कभी एक ना हो पाए ।संकलन एवं प्रस्तुती -मनोहर कुमार यादव पूर्व प्रदेश अध्यक्ष समाजवादी पार्टी झारखंड

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