विकास की परिभाषा क्या है ? भव्यता या भरे हुए पेट ?

विकास की परिभाषा क्या है ? भव्यता या भरे हुए पेट ?



    सुनकर अच्छा लगता है कि करीब 1000 करोड़ रुपए की लागत वाला निर्माणाधीन संसद भवन प्रजातंत्र को मजबूत करेगा, 3000 करोड़ रुपए की लागत से बना दुनिया का सबसे ऊंचा सरदार पटेल का स्टेचू राष्ट्रीय एकता को फौलादी बनाएगा । जब सत्ताधारी दल का एक सांसद किसी जाति विशेष को राष्ट्रहित में ज्यादा बच्चा पैदा करने को कहता है तब भी लगता है कि वह सिर्फ एक जनप्रतिनिधि की राष्ट्रहित की अपनी परिभाषा है लेकिन चिंता तब होती है जब एन एफएचएस - 5 की ताजा रिपोर्ट बताती है कि पिछले 4 वर्षों (2015 -16 से 2019 - 20) में भारत के अनेक बड़े राज्यों में नौनिहालों की स्थिति बदतर हुई है यानी कुपोषण के कारण उनके नाटे होने दुबले होने और पैदा होने के 5 वसंत में ही मृत्यु का प्रतिशत पहले से बढ़ गया है ऐसे बच्चे बड़े होकर शारीरिक ही नहीं मानसिक रूप से भी कमजोर होते हैं इन्हीं 4 वर्षों में सरकार ने बताया कि देश का विकास इतना हुआ है कि भारत डीजीपी में दुनिया में पांचवें स्थान पर पहुंच गया और अगले 4 वर्षों में 2 .93 ट्रिलियन से 5 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच जाएगा समझ में नहीं आता कि भव्य भवन स्टैचू कैसे राष्ट्र को मजबूत करेंगे जब उसके नौनिहाल ही कमजोर रहेंगे और कैसे एक जाति विशेष ज्यादा लेकिन कमजोर बच्चे पैदा कर राष्ट्र की सेवा कर सकेगी भारत दुनिया में पहला देश है जहां मानव विकास का सबसे प्रमुख पैरामीटर लोक स्वास्थ्य बेहतर होने की जगह अवनति पर हैं सर्वे की रिपोर्ट पर गुजरात उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र बिहार केरल कर्नाटक आंध्र प्रदेश असम पश्चिम बंगाल और जम्मू एवं कश्मीर तमाम पैरामीटर्स पर बेहद चिंताजनक स्थिति में हैं इन आंकड़ों का निष्कर्ष यह है कि देश में गरीबों के वर्ग में आज भी भुखमरी है 2019 के ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत दुनिया के117 देशों में 102 वें स्थान पर रहा जबकि 2015 में 93 स्थान पर था शायद युएनडीपी को भी विकास की परिभाषा में उंचे स्टैच्यू शामिल करने होंगे।
पांचवें राष्ट्रीय पारिवारिक स्वास्थ्य संरक्षण के सर्वे में यह चिंताजनक तथ्य सामने आया है कि 16 राज्यों में 5 साल से कम उम्र के बच्चों में कुपोषण बड़ा है और उनका वजन समान से कम है उल्लेखनीय है कि सुचांक की रिपोर्ट में बताया गया था कि हमारे देश मैं 6 से 23 माह आयु के केवल 9.6% बच्चों को ही न्यूनतम मानकों के अनुरूप पोषण मिलता है ।
पिछले साल आई यूनिसेफ की एक रिपोर्ट में रेखांकित किया गया था कि भारत में 5 साल से कम आयु में होने वाली कुल मौतों में से 69% मौतों का कारण कुपोषण होता है , वर्ष 2018 की वैश्विक पोषण रिपोर्ट के अनुसार हमारे देश में कुपोषित बच्चों की संख्या चार करोड़ 66 लाख है यह दुनिया में सबसे अधिक है।
मनोहर कुमार यादव 
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष समाजवादी पार्टी झारखंड

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