पंचकठीया बाजार में जमीन विवाद मामले में लावारिस जमीन को बेचने के लिए अद्भुत साजिश

पंचकठीया बाजार में जमीन विवाद

 मामले में लावारिस जमीन को बेचने 

के लिए अद्भुत साजिश

बरहेट प्रखंड अंतर्गत पंचकठीया बाज़ार
 
में विगत कुछ दिनों से एक जमीन

 विवाद का मामला सुर्खियों पर है





"News20" के लिए, बरहेट से मालिक अख्तर की रिपोर्ट
इस हकीकत को जानने के लिए जमीनी स्तर पर जाकर मुवायना करने पर विवादित मुद्दा में हस्तक्षेप श्री कमल किशोर भगत से मिली जानकारी के मुताबिक पता चला कि कमल किशोर भगत घर से सटे पूरब की ओर एक खाली भूमि का टुकड़ा स्तिथ है जो जमाबंदी न० 52 तथा दाग न० दाग न० 190-91 मांगु हेंब्रम के नाम से है। इसी जमीन का खजाना रसीद 1998 से 2005 तक मांगू हेंब्रम के नाम पर ऑफ लाइन कटता था जिसका ब्यौरा ग्राम प्रधान सलहाय हेंब्रम के पास मौजुद है ।
और वर्ष 2021 में इसी ग्राम प्रधान के द्वारा इसी जमीन का खजाना रसीद ऑन लाइन के माध्यम से मांगू हेंब्रम के तथाकथित वंशज नारायण हेंब्रम के नाम से काटा है। जबकि यह किसी भी आधार से सत्यापित नहीं है। नारायण हेंब्रम का दावा बे बुनियाद है क्योंकि नारायण हेंब्रम आज असम राज्य से आकर खुद को मांगू का वंशज साबित करने से पहले उस जमीन संबंधित कोई भी ब्यौरा मौजूद नहीं है। इसकी पहचान झारखंड राज्य के किसी भी जिला या प्रखंड पर उपलब्ध नहीं है, फिर भी इस आदिवासी जमीन को गैर आदिवासी के हाथो बेचने के लिए एक योजना तैयार कर सुखु मड़ैया एक दलाल के नाम से प्रचलित है अपने निजी स्वार्थ के लिए इस जमीन नकली वारिस खड़ा कर महाजन के हाथो बेचकर अपना जेब गर्म करना है।
आज इस साजिश में कई लोग शामिल नजर आ रहे हैं।
ग्राम प्रधान सालहाय हेंब्रम के पास नारायण हेंब्रम कौन सा दस्तावेज़ पेश किया है जिससे सत्यापित कर पंचकठीया का स्थाई निवासी बनाकर वोटर आईडी कार्ड किस आधार पर बनवाया है।
क्योंकि एसपीटी एक्ट के अनुसार 30 वर्ष से अधिक अपना निवास स्थल से स्थानांतरण कर किसी दूसरे राज्य का निवासी बन कर निवास कर रहा है तो उसी जगह का स्थाई निवासी का नागरिकता मिलने का प्रावधान है।
लेकिन आज जिस की सुरक्षा के लिए झारखंड सरकार अपना महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में विख्यात है आज उसी समाज के लोग अपने संरक्षण अधिनियम की धज्जियां उड़ाते हुए नजर आ रहा है।
मैं जब हाई कोर्ट का नियम का रक्षा के प्रति अपना दायित्व को उजागर करने का पहल किया तो गैर आदिवासी जमीन खरीदने वाले महाजन के तरफ से मुझे जान मारने की धमकी तथा किसी झूठा आरोप पर फंसा कर जेल भेजने का योजना बना रहा है।
कमल किशोर भगत का दावा है कि अगर इस जमीन के लिए जमीनी स्तर पर जांच कर पारदर्शिता लाए दूध का दूध पानी का पानी पूरा प्रखंड के सामने हो जाएगा।

Post a Comment

0 Comments