जिंदगी की कहानी

जिंदगी की कहानी



बच्चों आओ तुम्हे सुनाए एक कहानी
ये जीवन एक मेला है इसी का नाम है
"जिंदगी की कहानी "


जब अंकुरण होता है इसका
मासूम सा ये बचपन होता है
बढ़ते बढ़ते बड़ जाती इसकी
हर पन्ने पर एक नई कहानी।।


जैसे हम विद्यालय जाकर
रोज नया प्रतिदिन पड़ते है
जीवन भी है बिल्कुल ऐसा
रोज नया अनुभव करते है।।


बचपन के इस अल्हड़पन से
जब जीवन बाहर निकलता है
उठानी पड़ती है नित नई यहां
कोई ना कोई हमको जिम्मेदारी ।।


श्याम होते होते जीवन की
हर व्यक्ति यहां सभलता है
बातों से नही फिर वो अपने
स्वयं के अनुभव से चलता है।।


ऐसी ही होती है ये जिंदगानी
नमकीन है तो थोड़ी मीठी भी
हर अनुभव की है अलग कहानी
जैसे होते है धूप छांव की जोड़ी
वैसी ही " जिंदगी की कहानी " ।।


प्रतिभा दुबे (स्वतंत्र लेखिका)
मध्य प्रदेश ग्वालियर

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