मुरादाबाद के पश्चिम लगभग 40 किलोमीटर दूर
"अमरोहा "विभिन्न समुदायों का संगम है
चन्द्र शेखर शर्मा मार्केंड्य
रजबपुर गांव जो तेजी से एक छोटी बस्ती में बदल रहा है । मुरादाबाद के पश्चिम में लगभग 40 किलोमीटर और अमरोहा के दक्षिण पश्चिम में लगभग 12 किलोमीटर दिल्ली मुरादाबाद राजमार्ग पर स्थित है । यह गांव विभिन्न समुदायों का संगम है । जहां हिंदू मुसलमान और ईसाई एक साथ भाइयों की तरह रहते हैं । सूफी संतों के लिए गांव महत्वपूर्ण रहा है क्योंकि बहा उददीन इसी स्थान पर आए और बस गए । गांव का इससे पीछे एक इतिहास और भी है । एक पौराणिक कथा के अनुसार बाबा के आने से पहले रजबपुर एक निर्जन स्थान था । कहा जाता है कि एक बार लोधी परिवार का एक राजकुमार रजब गढ़ी से होकर गुजर रहा था और उसके कारवां के पास पानी का भंडार समाप्त हो गया था । राजकुमार परेशान था बताया जाता है कि वहां बाबा फरीदी नाम के एक संत रहते थे । राजकुमार बाबा के पास आया और पानी के लिए अनुरोध किया । बाबा ने राजकुमार को निर्देश दिया कि वह बाबा के हुजूरे में रखे एक बर्तन से अपने और अपने लश्कर के लिए पानी का उपयोग कर ले । पहले राजकुमार ने उपयोग करने में संकोच किया क्योंकि पानी का घड़ा छोटा था लेकिन बाद में राजकुमार और उसके पूरे लश्कर ने उसी बर्तन के पानी का इस्तेमाल किया । राजकुमार बाबा के हैरतअंगेज करिश्मा को देखकर दंग रह गया । क्योंकि सब को पानी पिलाने के बाद भी पानी का मटका पानी से भरा हुआ था । इस बात से प्रभावित होकर राजकुमार ने बाबा को 24 गांव इनाम में दिए ।
उस घटना के बाद इस जगह का नाम बदलकर रजब पुरी कर दिया गया है ।
आज इस गांव की आबादी लगभग 25 हजार के करीब है । जिसमें हिंदू मुसलमान सिख इसाई शामिल हैं । बताया जाता है कि बाबा बहाउददीन फरीदी ने गरीबों और दलितों के बीच काम किया । उन्होंने समाज को प्रेम समानता न्याय एकता और निस्वार्थ सेवा का पाठ पढ़ाया । उनके बाद बाबा बहाउददीन फरीदी के परिवार ने भी बाबा के मिशन को आगे बढ़ाने में विशेष योगदान दिया । और उनके परिवार के सदस्य अभी तक बाबा बहाउद्दीन फरीदी के पद चिन्हों पर चलते हुए समाज में शिक्षा शांति समानता का संदेश प्रसारित कर रहे हैं ।
दरगाह बाबा फरीदी सांप्रदायिक सद्भावना शांति और लोगों में समानता और एकता बनाने और बाबा के मिशन को आगे बढ़ाने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है ।
शेख फरीद फरीदी छः वें बाबा माने जाते हैं । सम्राट अकबर की अवधि के दौरान इन्हें संभल के कानूनगो के रूप में नियुक्त किया गया था । और उन्हें" चौधरी "की उपाधि से नवाजा गया था । इसलिए इनके परिवार को चौधरी परिवार के नाम से भी जाना जाता है ।
बाबा शेख फरीद गंज शकर के परिवार को हजरत बाबा बहाउद्दीन फरीदी उर्फ बाबा फरीद 12वीं के बीच बाबा का उर्स और 15 सफर का इस्लामी महीना बाबा के आध्यात्मिक गुरु ख्वाजा मोहिद्दीन चिश्ती को जाता है ।
हमारी भारतीय संस्कृति विभिन्न धर्म संस्कृति के नाम से जानी जाती है । यहां पर हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई बिना किसी भेदभाव के यहां पर रहते हैं । अनेकता में एकता ही हमारी भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी पहचान रही है । हमारा राष्ट्र कई धर्मों संप्रदायों से मिलकर बना है लेकिन वैचारिक समानता के आधार पर हम सबसे पहले भारतीय ही हैं ।
बाबा नहीं सामाजिक राजनीतिक क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है । बताया जाता है कि ख्वाजा मोहिद्दीन चिश्ती उर्फ गरीब नवाज एक सूफी संत थे । जिन्होंने लोगों को प्रेम एकता ऐसा और निस्वार्थ सेवा का पाठ पढ़ाया था । उन्होंने अपना मिशन अजमेर" राजस्थान" से शुरू किया । उनके शिष्य ख़्वाजा बख्तियार काकी ने यह संदेश जन-जन तक पहुंचाया । उन्होंने अपने संचालन के आधार के रूप में दिल्ली को चुना । तत्पश्चात पूर्वी बाबा शेख फरीद गजें शकर आगे आए और लोगों को प्रेम एकता समानता और सेवा के मिशन को पूरे भारत में फैलाया ।
हजरत बहाउददीन फरीदी बाबा फरीदी के पांचवें वंशज थे । बाबा समानता में विश्वास रखते थे उन्होंने सिखाया कि ईश्वर एक है और इस बार नहीं हम सब को एक समान बनाया है । उनकी नजर में ना कोई ऊंचा था ना कोई नीचा वह गरीब और अमीर को एक समान मानते थे । इसलिए उन्हें गरीब नवाज भी कहा जाता है । समाज के हर वर्ग से उनके शिष्य थे ।
बाबा का मुख्य जोर लोगों में प्रेम और सौहार्द स्थापित करने का था । उनका कहना था कि यदि कोई व्यक्ति धर्म संप्रदाय जाति के बंधन के बिना सभी को प्यार करता है तो वह कभी सांप्रदायिक नहीं हो सकता । जो व्यक्ति ईश्वर ईश्वर से प्रेम करता है वह व्यक्ति उस ईश्वर की किसी भी कृति से विद्वेष नहीं कर सकता । बाबा फरीद ने जीवन भर न्याय के लिए संघर्ष किया और कहा कि न्याय गरीबों तक पहुंचना चाहिए ।उनका मानना था कि गरीबों से गुलामों की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए । उनका मानना था कि सबको अपनी इच्छा अनुसार जीने का हक है क्योंकि बाबा न्याय में विश्वास रखते थे इसलिए दूर दूर से लोग अपने मतभेद और अन्य विवाद सुलझाने के लिए बाबा के पास आते रहते थे ।
बाबा फरीदी का वंश
हजरत बाबा से खरीदी मसूद गंज ए शकर
हजरत ख्वाजा शेख निजामुद्दीन शहीद रणथंबो
हजरत ख्वाजा शेख अली शेरे फरीदी
हजरत ख्वाजा शेख मुजीरूउद्दीन फरीदी
हजरत ख्वाजा शेख बहाउद्दीन बाबा फरीदी
हजरत ख्वाजा जियाउद्दीन फरीदी
हजरत ख्वाजा हाजी मूसा फरीदी
हजरत काजी ख्वाजा शेख जैनुलाब्दीन फरीदी
हजरत ख्वाजा शेख फरीद फरीदी हजरत ख्वाजा शेख सादिक मोहम्मद फरीदी
हजरत ख्वाजा शेख बदरुद्दीन फरीदी
हजरत ख्वाजा शेख दोस्त मोहम्मद फरीदी
हजरत ख्वाजा शेख मोहम्मद रोशन फरीदी
हजरत ख्वाजा से काजी फैज अहमद फरीदी
ख्वाजा ख्वाजा शेख इमाम बख्श फरीदी
हजरत ख्वाजा शेख निजामुद्दीन फरीदी
हजरत ख्वाजा शेख रफीउद्दीन फरीदी
हजरत ख्वाजा शेख हाफिज बदी उद्दीन फरीदी
हजरत ख्वाजा शेख रशीद फरीदी
हजरत ख्वाजा शेख अनवर फरीदी
ख्वाजा सालिम फरीदी एवं अन्य परिवारी जन
जश्ने फरीद
उर्स के दौरान जश्ने फरीद मनाया जाता है। इस अवसर पर बाबा के जीवन और शिक्षाओं पर एक डिजेनियम वर्ष आयोजित किया जाता है । संगोष्ठी के दौरान विभिन्न समुदायों के देश-विदेश के विभिन्न हिस्सों से अनेकों विद्वान शिक्षाविद और बुद्धिजीवी भाग लेते हैं । यह प्रथा कुछ वर्षों से चलती चली आ रही है।
शेख फरीदुद्दीन मसूद गंज ए शकर की पवित्र आध्यात्मिक कविता "श्लोक और शबद"गुरु ग्रंथ साहिब का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है । सिख रागी जत्थों के गीत गुरुद्वारों में पवित्र श्लोक और शबदों और अन्य भव्य समारोह में अपनी छाप छोड़ते हैं ।
हजरत बाबा फरीदी फाउंडेशन मसूद गंज ए शकर द्वारा दिए गए
सन 1975 से हजरत बाबा फरीद के अवसर पर बाबा फरीद 'मेडल' का सम्मान उन व्यक्तियों को दिया जाता है । जिन्होंने अस्तान ई आलिया राष्ट्रीय अखंडता सांप्रदायिक सद्भाव धार्मिक तीर्थ सामाजिक सांस्कृतिक प्रशासनिक वह साहित्य के लिए मूल्यवान सेवाएं प्रदान की है । और पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य किया है । उन सम्मानित व्यक्तियों को" बाबा फरीद पदक" 1975 से दिया जाता रहा है।
सन 1975 ख्वाजा हसन साहनी निजामी सजदा नसीम दरगाह हजरत निजामुद्दीन औलिया नई दिल्ली, प्रोफेसर गुरचरण सिंह महासचिव बाबा फरीद मेमोरियल सोसायटी।
1976 ज्ञानी जैल सिंह मुख्यमंत्री पंजाब, डॉक्टर देवराज ब्रिज डायरेक्टर ऑफ एजुकेशन पंजाब, कुंवर महेंद्र सिंह बेदी शायर, सैयद भारत अली डायरेक्टर मेगी स्टेट मुरादाबाद,
1980 इंद्रजीत शर्मा आर्गेनाइजेशन सेक्रेटरी बाबा मेमोरियल सोसायटी फरीदकोट
1981 सरदार इंदरजीत सिंह सेखों अध्यक्ष जिला हजरत बाबा फरीदकोट
1982 बीबी सिन्हा डायरेक्टर मेगीस्टार मुरादाबाद
डॉ पीके पांडे आई सर्जन मुरादाबाद
1984 बीपी गौतम फूड इंस्पेक्टर पीएचसी जोया
1985 एसके चंद्रा सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस मुरादाबाद
1986 सैयद अख्तर अली कांस्टेबल कोतवाली अमरोहा
1987 आर चंद्रा डायरेक्टर मेगी स्ट्रेट मुरादाबाद
एसएस चन्नी एडिशनल डिप्टी कमिश्नर फरीदकोट
1988 जीएस बार डिप्टी कमिश्नर फरीदकोट सरदार गुरदयाल सिंह सेक्रेटरी डिस्ट्रिक्ट रेड क्रॉस सोसाइटी फरीदकोट डॉक्टर आरसी जौहरी चीफ मेडिकल ऑफिसर मुरादाबाद
1989 सरदार इकबाल सिंह एसडीएम फरीदकोट
सरफराज सिद्दीकी एडिटर डेली गर्ज मुरादाबाद
कमलेश अग्रवाल एडिटर दिल्ली युग बंधु मुरादाबाद
1990 मोहम्मद कमर रिसीवर हजरत कुतुबुद्दीन बख्तावर काकी महरौली शरीफ नई दिल्ली
रहमान नैयर डायरेक्टर मंथली बिसविन शादी दिल्ली
जय श्रीवास्तव डॉक्टर मलेरिया ऑफिसर मुरादाबाद
1991 सर्वेश कौशल डिप्टी कमिश्नर फरीदकोट
भाई सविंदर सिंह एमपी पंजाब
मिस्टर नरेश जैन फरीदकोट
1997 सरदार सुखवीर सिंह बेदी एमपी पंजाब
महंत सेवादास सिंह नेशनल प्रेसिडेंट शहीद पेरूमन अकाली दल पंजाब
1998 सरदार भूपेंद्र सिंह जनरल सेक्रेटरी बाबा फरीद मेमोरियल सोसायटी
विनीत जैन जनरल सेक्रेटरी बाबा फरीद मेमोरियल सोसायटी दिल्ली स्टेट
1999 सरदार राय सिंह प्रिंसिपल सेक्रेट्री डिपार्टमेंट ऑफ नेशनल इन्वेस्टिगेशन गवर्नमेंट ऑफ़ उत्तर प्रदेश ।
मोहम्मद अफजल चीफ एडिटर वीकली अकबर ए नो दिल्ली
2001 ए वीनू प्रसाद डिप्टी कमिश्नर फरीदकोट
मासूम मुरादाबादी चीफ एडिटर खबरदार ए जदीद दिल्ली
2002 डॉ वकार उल हसन सिद्दीकी ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी रामपुर रजा लाइब्रेरी रामपुर उत्तर प्रदेश
स्वर्गीय ओम प्रकाश मल्होत्रा नेशनल सीनियर वाइस प्रेसिडेंट बाबा फरीद मेमोरियल सोसायटी
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