काश! आठवीं सन्तान लड़की होती, पुस्तक
का प्रयागराज संगम में हुआ विमोचन
पवित्र संगम धारा में पुस्तक विमोचन
बना कौतूहल का विषय
विनोद कुमार दुबे शिक्षक भांडुप मुंबई महाराष्ट्र
प्रयागराज।
जनपद अमेठी के एक छोटे से गांव में जन्म लिए डॉ रमाकान्त द्वारा रचित पुस्तक का विमोचन प्रयागराज में मां गंगा, मां यमुना की उपस्थिति में मां सरस्वती के कर कमलों द्वारा, लेखक की माता श्रीमती भानुमती तिवारी के हाथों ,सभी देवी देवताओं और तीर्थ राज प्रयाग की अध्यक्षता में,नाव रूपी मंच पर, संगम की बहती जलधारा के ऊपर ,संगम , प्रयागराज उत्तरप्रदेश मे " काश ! आठवीं सन्तान लड़की होती..." नामक पुस्तक का विमोचन किया गया। संगम की धारा में हुए पुस्तक का विमोचन कौतूहल का विषय बना रहा।
पुस्तक विमोचन के अवसर पर अपने वक्तव्य में लेखक डॉ रमाकान्त क्षितिज ने बताया कि,इस पुस्तक का प्रकाशन हिन्दी अकादमी मुंबई द्वारा किया गया है।विमोचन के अवसर पर भानुमती तिवारी,संगीता तिवारी,त्रिभुवन नाथ,आकाश ,मुक्ति,शशिकांत, श्रीकांत तिवारी आदि उपस्थित रहे। संगम की बहती जलधारा पर इस पुस्तक का विमोचन संगम पर उपस्थित भक्तों के बीच कोतुहल के साथ साथ अनोखा आयोजन बन गया।इसके पूर्व भी डॉ रमाकांत क्षितिज की पुस्तक " जीवन संघर्ष " का विमोचन मुंबई की एक श्मशान भूमि पर भी चर्चा का विषय बन चुका है।कई रचनाओं को समेटे इस पुस्तक में आध्यत्मिक, दर्शनिक एवं यथार्थ पूर्ण रचनाओं का संकलन है।लेखक ने उपस्थित लोंगो के साथ साथ पुस्तक से जुड़े तमाम लोगों का आभार माना। वहीं अमेठी जनपद वासी व लेखक के मूल गांव हारीपुर पूरे हरिराम तिवारी सहित समस्त क्षेत्रवासियों में खुशी की लहर है। क्षेत्रवासी अपने को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
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