कुरान की शिक्षाओं का महत्व
सामाजिक न्याय के लिए
महत्वपूर्ण है: मौलाना
मदरसा आलिया कांके में भव्य जलसा-ए-दस्तार बंदी का आयोजन
हिंदुस्तान के मशहूर उलेमा ए कराम, इस्लामिक स्कॉलर के साथ झारखंड सरकार के मंत्री विधायकगण के प्रतिनिधि हुए शामिल
रांची- मदरसा आलिया अरबिया, कांके रांची में 19 वां जलसा-ए-दस्तार बंदी" का भव्य आयोजन किया गया। शनिवार शाम 7 बजे से शुरू होकर देर रात तक चला। इस एतिहासिक जलसा-ए-दस्तार बंदी में हिंदुस्तान के मशहूर उलेमा ए कराम, इस्लामी स्कॉलर ने संबोधित किया। जलसे की अध्यक्षता हजरत मौलाना कारी अशरफुल हक मजाहिरी ने की और संचालन मजलिस उलेमा झारखंड के अध्यक्ष मौलाना साबिर हुसैन मजाहिरी ने किया। जलसे की शुरुआत ताली ए कुरान हजरत कारी सोहेब अहमद के तिलावत कुरान पाक से हुआ। बतौर मुख्यातिथि यूपी के हजरत मौलाना अहमदुल हुसैनी ने कुरान की शिक्षाओं का महत्व आध्यात्मिक विकास, नैतिक आचरण और सामाजिक न्याय के लिए महत्वपूर्ण बताया। कुरान न केवल एक धार्मिक मार्गदर्शन है, बल्कि यह शिक्षा और ज्ञान को भी अत्यधिक महत्व देती है, जो व्यक्ति और समाज दोनों के समग्र विकास के लिए आवश्यक है। जलसे में आपके आने से अल्लाह आपका गुनाह माफ कर देता है। वहीं विशिष्ट अतिथि हजरत मुफ्ती अनवर कासमी क़ाज़ी ए शरीयत दारुल क़ज़ा रांची ने अपने संबोधन में कहा कि हाफिज ए कुरान की बड़ी अहमियत है। एक शिक्षित व्यक्ति समाज के विकास और सुधार में बेहतर योगदान दे सकता है। कुरान का ज्ञान व्यक्ति को रोजमर्रा की ज़िंदगी में सोच-समझकर फैसले लेने में मदद करता है। मुफ्ती अनवर कासमी ने मौलाना सालिम और मौलाना अख्तर मजाहिरी के जीवन पर भी बात की। वहीं मुफ्ती सोहराब नायब नाजिम इमारत शरिया पटना ने कहा कि मुसलमानों जिस तरह रोजा रखना जरूरी है उसी तरह अपने बच्चों को दीनी शिक्षा देना जरूरी है। नौजवानों जहेज़ लेने से तौबा करो, किसी बाप को मजबूर न करो। जहेज़ दीमक है वो तुम्हारी घर को खत्म कर देती है। वहीं मुफ्ती अमानत ने कहा कि आज जरूरत है मकतब के निजाम को मजबूत करने का। लोगों स्कूलों में आपके बच्चों से ईमान छीनी जा रही है। वहीं मौलाना गैयूर अहमद कासमी ने कहा कि नौजवानों समाज के बुराइयों को खत्म करने पर काम करो। नेक मजलिस में बैठने वालों को अल्लाह गुनाह माफ कर देता है। जलसा में 342 हुफ्फाज ए कराम के सरो पर दस्तार बांधी गई। मदरसे के मोहतमीम कारी अशरफुल हक, नायब मोहतमीम मौलाना मुकर्रम और जिम्मेदार कारी अब्दुर रऊफ, मौलाना इम्तियाज, मौलाना मंसूर, मौलाना शहाबुद्दीन, मौलाना फिरोज ने बताया कि यह जलसा एक तारीखी जलसा रहा। वहीं मौलाना ताजुद्दीन, मौलाना अहमद हुसैन, मौलाना मुस्तफा, मौलाना मोईन, कारी खालिद, कारी मुजफ्फर, मौलाना शहामत, मौलाना मुर्तजा, हाफिज कुद्दूस, हाफिज इरफान, हाफिज ग़ुलशाद, हाफिज मुश्ताक ने संयुक्त रूप से बताया कि यह जलसा 11 वर्ष के बाद होने से पूरी तरह कामयाब रहा। मदरसा के प्रिंसिपल कारी अशरफुल हक और नायब प्रिंसिपल मौलाना मुकर्रम ने बताया कि इस एतिहासिक जलसा में झारखंड सरकार के मंत्री और विधायकगण के प्रतिनिधि शामिल हुए। कारी जमशेद जौहर और कारी नेसार दानिश ने नात नबी पढ़ी तो पूरा मजमा झूम उठा। जो इश्क मोहम्मद का तलबगार न होगा, महशर में कोई उसका मददगार न होगा। वहीं कारी जमशेद जौहर ने पढ़ा कि आलिया के जां थे मौलाना मेरे अख्तर हुसैन, सच के साइबा थे मौलाना मेरे अख्तर हुसैन। तो मजमा झूम उठा।
नौजवानों ने संभाली कमान
जलसे में भीड़ काफी थी लोगों ने कहा कि लगभग 30 से 40 हजार की भीड़ थी। इस भीड़ को किसी भी तरह कि कोई परेशानी न हो इसका ख्याल नौजवानों और मोहल्ले वालों ने रखा। मौलाना ने बताया कि इस मोहल्ला के एक एक घर में मेहमानों के खाने का इंतेज़ाम किया गया था।
जिन्होंने जलसे को कामयाब बनाया सभी का शुक्रिया
मदरसा के मोहतमीम मौलाना अशरफुल हक मजाहिरी ने कहा कि इस जलसे को कामयाब बनाने वाले मेरे नौजवान, मोहल्ला के लोग, हमारे शिक्षक आदि का हम शुक्रिया अदा करते हैं।
चाय, कॉफी, बिस्किट, नाश्ता, खाना सब फ्री
यहां के नवजवानों और मोहल्ले वालों ने भी दिल खोल कर साथ दिया। देर रात तक फ्री चाय, कॉफी, बिस्किट, पानी बटता रहा।
इस मौके पर मुफ्ती अबू दाऊद, जमीयत उलेमा के अध्यक्ष मौलाना अब्दुल कय्यूम कासमी, महासचिव हाजी शाह उमैर, मौलाना असगर मिस्बाही, मौलाना शौकत, मौलाना रफीक, मौलाना अबुल कलाम, मौलाना अब्दुल वाजिद चतुर्वेदी, हाफिज आरिफ़, मौलाना अब्दुल माजिद, अधिवक्ता परवेज़, झामुमो मुश्ताक, मौलाना तल्हा नदवी, ऐनुल हक अंसारी, साबिर खान, शमीम बड़ाइक, हकीम, डॉक्टर मालिक शुजाऊदीन, हाजी अलाउद्दीन, अधिवक्ता जलील, जीएम असफर अली, मुजीब अली, मौलाना नजमुद्दीन, मौलाना शामिउल हक, कारी उस्मान, कारी असजद, मौलाना अलीमुद्दीन, मौलाना कमालुद्दीन, मौलाना नैयर इकबाल, मौलाना बेलाल, मौलाना इनमुल्ला, मौलाना समीउल्लाह, मौलाना मनव्वर मजाहिरी, समेत दर्जनों मदरसा सैंकड़ों लोग मौजूद थे।


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