मदरसा अरबिया तजवीदुल
कुरआन हुसीर कांके का 13वां
भव्य दस्तारबंदी जलसा संपन्न
उर्दू तालीम और दीन की रौशनी पर उलमा ने दिया जोर, 15 हुफ्फाज़ की हुई दस्तारबंदी
रांची/हुसीर। मदरसा अरबिया तजवीदुल कुरआन हुसीर कांके रांची का 13वां भव्य जलसा-ए-दस्तारबंदी अकीदत और शानो-शौकत के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की। जलसे में 15 हाफिज़-ए-कुरआन के सिर पर दस्तार-ए-फ़ज़ीलत बांधी गई। देश के नामचीन उलमा-ए-कराम की मौजूदगी में पूरा माहौल दीनि और रूहानी रंग में रंगा नजर आया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हाफिज़ व कारी मोहम्मद उस्मान रशीदी ने की, जबकि सरपरस्ती मौलाना कारी अशरफुल हक़ मज़ाहिरी ने की। मंच संचालन मौलाना कारी बाबर अशरफी ने किया। आए हुए सभी मेहमानों का स्वागत हज़रत मौलाना नैय्यर इकबाल और हुसीर अंजुमन ने किया।
मुख्य अतिथि मौलाना अबूतालिब रहमानी ने अपने संबोधन में उर्दू तालीम और इल्म की अहमियत पर विस्तार से रोशनी डालते हुए कहा कि “शिक्षा एक ऐसी रौशनी है जिसे मुश्किलों की आंधियां कुछ वक्त के लिए कमजोर जरूर कर सकती हैं, लेकिन यह रौशनी फिर पहले से ज्यादा तेज होकर समाज को रोशन करती है। इल्म इंसान को अंधेरों से निकालकर कामयाबी की राह दिखाता है।” उन्होंने बच्चों को दीनि और दुनियावी तालीम से जोड़ने पर जोर दिया।
विशेष संबोधन में मौलाना मुफ़्ती अशरफ अब्बास कासमी ने कहा कि मदरसे समाज में इल्म, अखलाक और इंसानियत की बुनियाद को मजबूत करने का काम कर रहे हैं। उन्होंने हाफिज़-ए-कुरआन बनने वाले छात्रों और उनके अभिभावकों को मुबारकबाद दी।
बारिश और खराब मौसम के बावजूद नौजवानों का हौसला बुलंद रहा। लगातार बारिश के बीच भी युवाओं ने पूरी मेहनत और लगन के साथ कार्यक्रम की जिम्मेदारियां निभाईं। मौलाना नैय्यर इकबाल और हुसीर अंजुमन के अध्यक्ष सुलैमान अंसारी, नसीम, नेसार ने कहा कि इन्हीं नौजवानों की मेहनत और जज्बे की बदौलत जलसा पूरी तरह कामयाब रहा और कार्यक्रम शानदार अंदाज में संपन्न हुआ। इस मौके पर कारी सोहराब, हाफिज अली इमाम, मौलाना अशरफ़, कारी ज़फ़र, मुफ्ती हिफजुर्रहमान, मौलाना उजैर, मौलाना मोहम्मद अकरम कासमी समेत कई उलमा-ए-कराम मौजूद रहे। नातख़्वानी शबान दिल खैराबादी और असद आज़मी ने पेश की, जिसे लोगों ने खूब सराहा।
कार्यक्रम को सफल बनाने में अंजुमन हुसीर के अध्यक्ष सुलैमान अंसारी, सचिव नेसार एवं नसीम अंसारी, कोषाध्यक्ष शफीउल्लाह, इकरामुल हक, सरफराज, हाजी आबिद गागी, मोबीन, रकीब, इमरोज़ आलम, अकील अजहर, तौसीफ अंसारी, सरफराज अंसारी, अकरम अंसारी, अकबर, सद्दाम, सलमान, इरफान अंसारी, इरफान, नसीम, जुल्फान, हिदायत, शादाब, निजामुद्दीन, आरिफ, सादिक, तारीक, जिकरुल्लाह, शहीद, मुनाज, मुफीद, सलामत, वाजिद, इश्तियाक, रमजान, कैसर, रहमान, अदनान, वकील, नसीम अंसारी, शोएब अंसारी, आसिफ, तौकीर, नुरुल्लाह, रिजवान, अनस, हसन, वसीम, हैदर, साजिद, महताब और साकिब समेत कई नौजवानों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में अहम रोल अदा किया।

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