लोकतंत्र, आत्मनिर्भरता और सशक्तिकरण के साक्षात प्रमाण हैं लोकनायक जयप्रकाश नारायण : डॉ. प्रणव कुमार बब्बू

लोकतंत्र, आत्मनिर्भरता और 

सशक्तिकरण के साक्षात प्रमाण हैं 

लोकनायक जयप्रकाश 

नारायण : डॉ. प्रणव कुमार बब्बू






लोकनायक की 124 वीं जयंती के अवसर पर राजधानी रांची के पिठोरिया सतकनादु चित्रांश सिटी के समीप समारोह एवं सेमिनार का आयोजन.

रांची 11 अक्टूबर. अधिवक्ता, भाजपा नेता और सामाजिक-वैचारिक संगठन रांची रिवोल्ट जनमंच के संयोजक डॉ. प्रणव कुमार बब्बू ने कहा है कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण एक वैसे व्यक्तित्व हैं जो अपने-आप में लोकतंत्र की रक्षा के साथ ही आत्मनिर्भरता और आम लोगों के सशक्तिकरण का साक्षात प्रमाण हैं. डॉ. बब्बू ने कहा कि अपनी संपूर्ण क्रांति के माध्यम से लोकनायक ने इस बात को बहुत अच्छी तरीके से स्थापित कर दिया कि देश में एक-एक व्यक्ति की अपनी पहचान है और यदि वह सशक्त होकर सामूहिक रूप से अपना योगदान दे तो वह न केवल लोकतंत्र की रक्षा कर सकता है बल्कि, अपने आप को सशक्त बनाने के साथ-साथ देश को आत्मनिर्भर बनाने की भी क्षमता रखता है.

आज राजधानी रांची के पिठोरिया-चंदवे पथ पर स्थित सतकनादु के चित्रांश सिटी के समीप पूर्वाह्न साढ़े 11 बजे आयोजित समारोह में वहाँ स्थापित लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद आज के राजनीतिक दौर में लोकनायक के विचारों की प्रासंगिकता विषय पर आयोजित सेमिनार की अध्यक्षता करते हुए और उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए डॉ. बब्बू ने कहा कि लोकतंत्र की रक्षा के साथ ही किसी भी प्रकार की तानाशाही और गैर कानूनी कार्यों के खिलाफ में खड़े होकर आवाज बुलंद करने की जैसी जीवटता लोकनायक जयप्रकाश नारायण में थी वह बहुत कम नजर आती है लेकिन वह आज के परिपेक्ष्य में बहुत अधिक आवश्यक है. डॉ. बब्बू ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण भले ही अपने शारीरिक रूप में हमारे साथ नहीं है लेकिन उनके विचारों की प्रासंगिकता हमेशा बनी रहेगी. इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में अपने संबोधन में भारतीय जनता पार्टी झारखण्ड प्रदेश मंदिर-मठ प्रकोष्ठ के संयोजक संजय शौर्य ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता एवं संप्रभुता आज यदि बरकरार है और आज यदि हम दुनिया के तीन सबसे विकसित देशों में अपने-आप को शामिल करने का सपना देख रहे हैं तो इसकी पृष्ठभूमि में भी कहीं-ना-कहीं जयप्रकाश नारायण के वह विचार ही हैं. आज के जयंती कार्यक्रम और आयोजित सेमिनार में मुख्य रूप से संजय शौर्य, राकेश रंजन बब्लू, सूरज सिन्हा, उपेन्द्र कुमार बब्लू, मंटू, संतोष, इजहार, मुनव्वर अंसारी, मोहम्मद कलीम, कंचन सिन्हा, पायल बनर्जी, तसव्वुर अंसारी, कामेश्वर लोहार, मुतल्लिव अंसारी, मुखिया अजय उरांव, शकील अंसारी, संजीव कुमार सिन्हा के साथ ही अनेक लोगों की गरिमापूर्ण उपस्थिति रही.

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