झारखण्ड फिलोसोफिकल फोरम’ निरंतर
दर्शनशास्त्र को व्यावहारिक एवं आम आदमी
के लिए दर्शन को ग्राह्य बनाने की दिशा में कार्यशील है
‘झारखण्ड फिलोसोफिकल फोरम’ निरंतर दर्शनशास्त्र को व्यावहारिक एवं आम आदमी के लिए दर्शन को ग्राह्य बनाने की दिशा में कार्यशील है | इसी परंपरा को कायम रखते हुए, आज दिनांक 29 मई 2021, शनिवार, को एक अंतरिम ऑनलाइन बैठक का आयोजन किया गया | जिसमें फोरम के द्वारा अधिकतम लोगों को इसका शैक्षणिक एवं व्यावहारिक लाभ देने हेतु योजना बनाने एवं उन्हें कार्यान्वित करने की दिशा में विचार-विमर्श किया गया | जिसमें जून माह के अंतिम सप्ताह में वर्तमान सामाजिक समस्या के विश्लेषण से सम्बंधित दर्शनशास्त्र की प्रासंगिकता विषय पर एक वेबिनार के आयोजन हेतु परिचर्चा की गई, साथ ही एक जर्नल के प्रकाशन हेतु प्रस्ताव भी रखा गया | इसके लिए बैठक में उपस्थित सभी सदस्यों के सुझावों को आमंत्रित किया गया तथा इसके प्रकाशन हेतु प्रतिबद्धता जाहिर की गई | झारखण्ड फिलोसोफिकल फोरम की सदस्यता लेने एवं भविष्य के लिए शैक्षणिक योजनाएँ तय करने के सम्बन्ध में विचार-विमर्श भी बैठक के प्रमुख बिंदु रहे |
इस बैठक में योगदा सत्संग महाविद्यालय के दर्शनशास्त्र के विभागाध्यक्ष डॉ० प्रदीप कुमार सिन्हा, करीमसिटी कॉलेज जमशेदपुर के प्रोफेसर डॉ० अशरफ बिहारी, गॉसनर कॉलेज के डॉ० प्रदीप कुमार गुप्ता, जे० एन० कॉलेज धुर्वा के डॉ० प्रमोद कुमार सिंह, वाई.बी.एन. यूनिवर्सिटी रांची की डॉ. रीना भारती, आशियारा के चीफ एडवाइजर श्री.एस.बी.शर्मा, योगदा सत्संग महाविद्यालय की डॉ. मल्लिका कुमारी, राँची विश्वविद्यालय दर्शन विभाग की डॉ. स्नेहा ओझा एवं डॉ. सोनी कुमारी आदि ने हिस्सा लिया |
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